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बाजारों में तिरंगे की मांग बढ़ी, हर ट्रैक्टर पर किसानों की पताका के साथ शान से लहरा रहा राष्ट्रीय ध्वज

इस बार किसान आंदोलन के चलते राष्ट्रीय ध्वज की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। बाजारों में कपड़े व अन्य सामान बेचने वाली दुकानों पर भी ध्वज एवं किसानी पताका बेची जा रही है। दिनभर इन दुकानों पर आंदोलनकारी किसानों का जमावड़ा लगा रहता है

बाजारों में तिरंगे की मांग बढ़ी, हर ट्रैक्टर पर किसानों की पताका के साथ शान से लहरा रहा राष्ट्रीय ध्वज
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रोहतक के देवीलाल पार्क के पास तिरंगे बेचता युवक व बहादुरगढ़ में एक ट्रैक्टर पर लहरा रहे चार-चार तिरंगे।

Haryana : कृषि कानूनों के कारण आंदोलनकारी किसान बेशक सरकार से खफा हैं, लेकिन उनमें देशभक्ति उफान पर है। गणतंत्र दिवस पर राजधानी में परेड निकालने को लेकर उत्साहित किसानों की शायद ही कोई ऐसी ट्रैक्टर-ट्रॉली हो, जिस पर तिरंगा न लगा हो। तिरंगे और किसानी पताका लगाए सड़कों से गुजर रहे ट्रैक्टरों में देश भक्ति और किसानों पर बने गीत बज रहे हैं। बाजारों में तिरंगे की बिक्री भी खूब हो रही है।

दरअसल, कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। बीते लगभग दो महीने से तो दिल्ली से लगती सीमाओं पर पड़ाव डाले हुए हैं। जब आंदोलन शुरू हुआ तो ट्रैक्टरों और किसानों के शामियानों पर किसानी पताका लहरा रही थी। लेकिन जब किसान नेताओं द्वारा दिल्ली में परेड निकालने का एलान किया गया तो देश का राष्ट्रीय ध्वज भी किसानों द्वारा ट्रैक्टरों पर लगाया जाने लगा। अब परेड की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। भले ही आंदोलनकारियों में सरकार के प्रति नाराजगी हो, लेकिन उनमें देशभक्ति का जज्बा उफान पर नजर आ रहा है। तमाम ट्रैक्टरों, पंडालों व अन्य वाहनों पर तिरंगा शान से लहरा रहा है। पंजाब और हरियाणा से लगातार आ रहे किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर तिरंगा और किसानी पताका लगा है। ट्रैक्टरों में देशभक्ति और खेती पर बने गीत गूंज रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर हर बार बाजारों में दुकानों पर छोटे-बड़े आकार के तिरंगे सज जाते हैं। इनकी मांग बढ़ जाती है। इस बार किसान आंदोलन के चलते राष्ट्रीय ध्वज की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। बाजारों में कपड़े व अन्य सामान बेचने वाली दुकानों पर भी ध्वज एवं किसानी पताका बेची जा रही है। दिनभर इन दुकानों पर आंदोलनकारी किसानों का जमावड़ा लगा रहता है। दुकानदारों की मानें तो इस बार मांग कई गुणा ज्यादा है। अधिकांश ग्राहक आंदोलनकारी की हैं। ज्यादातर आंदोलनकारी टै्रक्टर पर लगाने के लिए बड़े झंडों की डिमांड कर रहे हैं।

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