Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने हटाए बेरिकेड्स

दिल्ली के इलाके में डाली गई मिट्टी को भी हटाया जा रहा है। अब यहां केवल लोहे के बेरिकेड्स हैं, जिन्हें परेड से पहले ही हटाया जाएगा।

टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने हटाए बेरिकेड्स
X

टीकरी बॉर्डर पर बेरिकेड व तारबंदी के पीछे खड़े सुरक्षाकर्मी और बेरिकेड हटाने के बाद सड़क से मिट्टी हटाती क्रेन।


हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

आंदोलनकारी किसानों की 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली पुलिस भी तैयारियों में जुट गई। कई दौर की वार्ता और सहमति के बाद रविवार को दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर पर मल्टी लेयर सीसी बेरिकेडिंग हटाना शुरू कर दिया। दिल्ली के इलाके में डाली गई मिट्टी को भी हटाया जा रहा है। अब यहां केवल लोहे के बेरिकेड्स हैं, जिन्हें परेड से पहले ही हटाया जाएगा।

बता दें कि पंजाब व हरियाणा से दिल्ली कूच करने वाले किसानों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने 24 व 25 नवंबर को मल्टी लेयर बेरिकेडिंग की थी। दिल्ली पुलिस और किसानों में 27 नवंबर को भयंकर टकराव के बाद यहां माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए कई लेयर बेरिकेड्स लगाए, जिसमें तारबंदी से लेकर रोड रोलर व रेत एवं बजरी से भरे दर्जनों ट्रकों को खड़ा कर दिया गया था।

कई क्रेन व अन्य वाहन भी खड़े कर अवरोध बनाने का प्रयास दिल्ली पुलिस ने किया था। लेकिन 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर परेड को लेकर सहमति बनने के बाद दिल्ली पुलिस ने रविवार को बॉर्डर पर इसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। कई दौर की वार्ता के बाद दिल्ली पुलिस और किसानों में सहमति बनने के बाद आखिरकार रविवार की दोपहर में अनेक प्रकार के बेरिकेड्स हटा दिए गए। केवल लोहे के बेरिकेड्स की लेयर को रखा गया है। हालांकि पुलिसकर्मी हर प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंधों के साथ तैनात रहे।

रविवार को भी टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे दो हजार ट्रैक्टर

पंजाब-हरियाणा के विभिन्न जिलों से रविवार को करीब दो हजार ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ किसान 26 जनवरी की परेड में शामिल होने के लिए दिल्ली बार्डर पर पहुंचे। रविवार को विभिन्न गांवों से किसान सैकड़ों ट्रैक्टरों में सवार होकर बहादुरगढ़ पहुंचे। इन सभी में 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को लेकर गजब का उत्साह है। किसानों ने बताया कि जब तक सरकार किसानों की जायज मांगों को नहीं मानेगी और कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, तब तक किसान इस आंदोलन पर डटे रहेंगे।






Next Story