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पलवल में इस कारण हो रही बच्चों की मौत, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र का दौरा कर दी रिपोर्ट

पलवल में कुछ ही दिनाें में सात से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि 12 सितंबर को रैपिड रिस्पांस टीम ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और जहां मौतों की सूचना मिली थी वहां घरों का सर्वेक्षण भी किया गया।

Three children died during tragic accident in Gaya bihar crime news
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बच्ची की मौत

चंडीगढ़। हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने पलवल में हुई मौतों की जानकारी देते हुए बताया कि 12 सितंबर, 2021 को रैपिडरिस्पांस टीम ने इस प्रकोप की जांच के लिए प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और जहां मौतों की सूचना मिली थी वहां घरों का सर्वेक्षण भी किया गया। उन्होंने बताया कि होने वाली पांच मौतों में से दो मौतें पांच साल से कम आयु के बच्चों की निमोनिया से और तीन मौतें पांच साल से अधिक आयु के बच्चों की हुई हैं। एक लड़की जिसका नाम अमांशा पुत्री इरफान, आयु तीन साल, जीएमसी नल्हड में गैस्ट्रोएंटेराइटिस, बुखार, पानी से भरा मल और उल्टी तथा संदिग्ध डिप्थीरिया के रूप में निदान हेतु भर्ती है।

उन्होंने बताया कि गत 11 सितंबर, 2021 को जिला पलवल के चिल्ली और चिल्ला गांवों में पांच बच्चों की बुखार से होने वाली संदिग्ध मौतों की सूचना जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को प्राप्त हुई थी। इस संबंध में जमीनी स्थिति का आंकलन करने के लिए जिला रैपिड रिस्पांस टीम को सिविल सर्जन, पलवल द्वारा सक्रिय करते हुए प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया था। डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि के समन्वय के साथ प्रभावित गांवों की महामारी विज्ञान जांच का आदेश दिया गया। उन्होंने बताया कि गांव चिल्ली व चिल्ला की कुल आबादी क्रमश: 2947 और 763 है, जिसमें कुल हाउसहोल्ड 186 और 72 हैं। यह घटना 9 सितंबर, 2021 को शुरू हुई।

अरोड़ा ने बताया कि सिविल सर्जन, पलवल द्वारा दी गई रिपोर्टस के अनुसार 14 सितंबर, 2021 तक कुल 7 मौतों में से दो मौते पांच साल से नीचे के बच्चों की तथा 5 मौते पांच साल से अधिक आयु के बच्चों की हुई हैं। इसी प्रकार, राजीव अरोड़ा ने बताया कि चल रही महामारी वज्ञिान जांच के अनुसार स्वास्थ्य टीमों द्वारा घर-घर जाकर बुखार के मामलों की जांच व निरीक्षण किया जा रहा है और कल तक कुल 1089 घरों का निरीक्षण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में फॉगिंग, जल निकायों की जांच इत्यादि जैसी सभी एंटीलारवल गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल की पाइप लाइन में कुछ लीकेज भी पाए गए हैं और जनस्वास्थ्य अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द ठीक कराने के नर्दिेश भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि अस्थाई चिकत्सिा शिविर क्षेत्र में ही स्थापित किया गया है और मामलों का लक्षण के अनुसार इलाज किया जा रहा है और गंभीरता के अनुसार संदर्भित भी किया जा रहा है।

इस बीच, क्षेत्र के प्रयोगशाला निष्कर्षों के अनुसार 175 मलेरिया ब्लड स्लाइड की सभी नकारात्मक रिपोर्ट आई, 250 आरडीटी मलेरिया परीक्षण रिपोर्ट की नकारात्मक रिपोर्ट, गैर-प्रतिक्रियाशील 12 डेंगू एलिसा नमूने, 64 आरटीपीसीआर कोविड-19 परीक्षणों की नकारात्मक रिपोर्ट और 50 कोविड-19 एंटीजन परीक्षण की नेगेटिव रिपोर्ट है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि हालांकि इन बच्चों की मृत्यु के अंतिम कारणों पर केवल महामारी वज्ञिान की जांच पूरी होने के बाद ही टिप्पणी की जा सकती है, लेकिन प्रथम दृष्टया, प्रकोप का संभावित कारण अस्वच्छ स्थितियां और पीने के पानी के अवैध पाइप कनेक्शन हो सकते हैं, जिसके कारण पीने के पानी का दूषित होना हो सकता है। उन्होंने बताया कि नल्हड मेडिकल कालेज के रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मौतों का कारण निमोनिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस हो सकता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और आज की तारीख में स्थिति नियंत्रण में है। अरोड़ा ने कहा कि हम स्थिति पर कड़ी निगरानी भी रख रहे हैं।

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