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Marketing की आड़ में भ्रूण लिंग जांच के लिए तलाशता था ग्राहक, जानें कई अहम खुलासे

मामले के मुख्य आरोपित डॉ. हरिओम के पास यह काफी समय तक काम करता रहा। अपने मार्केटिंग के काम के जरिये ही यह इधर-उधर अस्पतालों-क्लीनिकों में जाता था और ग्राहकों (Customers) को तलाशता था। जब डॉ. हरिओम फंसा तो भी इसने सबक नहीं लिया और फिर किसी अन्य डॉक्टर से भ्रूण लिंग परीक्षण करवाने लगा।

गिरफ्तार
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प्रतीकात्मक फोटो

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

भ्रूण लिंग जांच मामले में आत्म समर्पण (Surrender) करने वाले शाहिद अहमद से कई खुलासे हुए हैं। शाहिद हास्पिटल मार्केटिंग (Marketing) की आड़ में ग्राहक तलाशता और भ्रूण लिंग जांच (Gender check) कराता था। बहादुरगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में पेश कर आरोपित को न्यायिक हिरासत (judicial custody) में भेज दिया। अब आरोपित को बादली पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी।

गत 19 जून को सामने आए भ्रूण लिंग जांच के मामले में कई आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद के निवासी शाहिद अहमद ने अदालत में आत्म समर्पण किया था। पुलिस ने उसे दो दिन के रिमांड पर लिया था। पूछताछ में सामने आया कि शाहिद हास्पिटल मार्केटिंग का काम करता था। इसी की आड़ में इसके कई अस्पतालों व डॉक्टरों से संपर्क हुए। भ्रूण लिंग जांच मामले के मुख्य आरोपित डॉ. हरिओम के पास यह काफी समय तक काम करता रहा। अपने मार्केटिंग के काम के जरिये ही यह इधर-उधर अस्पतालों-क्लीनिकों में जाता था और ग्राहकों को तलाशता था। जब डॉ. हरिओम फंसा तो भी इसने सबक नहीं लिया और फिर किसी अन्य डॉक्टर से भ्रूण लिंग परीक्षण करवाने लगा।

डॉ. हरिओम वाले केस के लगभग तीन महीने बाद ही झज्जर जिले से जुड़े एक और केस में इसका नाम सामने आया। इस केस में शाहिद फर्जी पेशेंट (डिकोय) को नोएडा के बजाय गाजियाबाद के किसी डॉक्टर के पास ले गया था। हालांकि बहादुरगढ़ पुलिस से पूछताछ में इसने किसी अन्य डॉक्टर का नाम नहीं उगला है, लेकिन इसके तार भ्रूण लिंग जांच करने वाले कई डॉक्टरों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। अब बादली थाना पुलिस जल्द ही इसे पूछताछ के लिए हिरासत में लेगी। इसके बाद कुछ और नामों के खुलासे की संभावना है।

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