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Corona Effect : गन्ने की छिलाई के लिए नहीं मिल रही लेबर, किसानों के सामने संकट

किसानों के समक्ष एक बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी बची हुई गन्ने की फसल की छिलाई करके मिल तक कैसे पहुंचाएं। साथ में गन्ने की बिजाई भी करनी पड़ रही।

Corona Effect : गन्ने की छिलाई के लिए नहीं मिल रही लेबर, किसानों के सामने संकट
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 खेतों में गन्ने की फसल की छिलाई करते मजदूर।

आनंद जाटायन. गोहाना ( सोनीपत )

कोरोना महामारी की मार से किसान भी अछूते नहीं हैं। महामारी का संक्रमण फैलने से लेबर का अपने घरों की ओर पलायन से गन्ना उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों को गन्ने की फसल की छिलाई के लिए लेबर की किल्लत झेलनी पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक चौ. देवीलाल चीनी मिल क्षेत्र के अंतर्गत अभी भी खेतों में करीब ढ़ाई लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है। ऐसे में किसानों के समक्ष एक बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी बची हुई गन्ने की फसल की छिलाई करके मिल तक कैसे पहुंचाएं।

क्षेत्र में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए गन्ने की छिलाई का काम एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस समय किसानों को गन्ने की छिलाई के लिए लेबर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गांव आहुलाना स्थित चौ. देवीलाल चीनी मिल द्वारा करीब सप्ताहभर पहले पहले खेतों में खड़ी गन्ने की फसल का सर्वे करवाया गया था। सर्वे रिपोर्ट में तब करीब 3 लाख क्विंटल गन्ना खेतों में खड़ा बताया गया था। एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल भी चीनी मिल क्षेत्र के अंतर्गत खेतों में करीब ढ़ाई लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है। क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान संदीप छिछड़ाना और कृष्ण मलिक के अनुसार गन्ने की छिलाई के लिए अधिकतर लेबर बिहार और दूसरे प्रदेशों से आती है। अप्रैल के महीने में देश में एक बार फिर कोरोना महामारी के दस्तक देने से लॉकडाउन के भय से लेबर अपने घरों को पलायन कर गई। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ने की फसल की छिलाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है। अब किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी बची हुई गन्ने की फसल की छिलाई करवाकर उसे चीनी मिल तक कैसे पहुंचाएं।

साथ में करनी पड़ रही गन्ने की बिजाई

इस समय खेतों में गन्ने की बिजाई का काम भी चल रहा है। किसानों को गन्ने की छिलाई साथ गन्ने की बिजाई भी करनी पड़ रही है। लेबर की कमी के चलते गन्ने की फसल की छिलाई का काम भी पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसानों को गन्ने की बिजाई का काम समय पर पूरा न होने की चिंता है।

दोहरी मार, देनी पड़ रही दौगुनी लेबर

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल का कहना है कि चीनी मिलों को देरी से चलाया जाता है। इसीलिए गन्ने की फसल की समय पर समय पर पेराई नहीं हो पाती है। यदि चीनी मिलों का पेराई सत्र 1 नवंबर से शुरू कर दिया जाए तो मार्च के महीने के अंत तक पूरा गन्ना चीनी मिलों में पहुंच सकता है। उनका कहना है कि आमतौर पर गन्ने की छिलाई 45 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन 15 अप्रैल के बाद जैसे ही गर्मी बढ़ती है वैसे ही गन्ने की छिलाई का रेट भी दौगुना हो जाता है। फिलहाल किसानों को 70 से 100 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने की छिलाई देनी पड़ रही है। गर्मी में गन्ने का वजन भी काफी कम हो जाता है। ऐेसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।


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