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अखाड़ा हत्याकांड : जिंदा बचे कोच अमरजीत बोले, राक्षस है सुखविंद्र, भगवान भी माफ नहीं करेगा

गोली से घायल हुए कोच अमरजीत का इलाज गुरुग्राम के एक अस्पताल में चल रहा था। रविवार को उन्हें वहां से छुट्टी मिली। अमरजीत घर बजाय सीधे अखाड़े में ही आए, उनका कहना था कि यही मेरा परिवार है। यहां सभी से मिलने के बाद ही घर जाऊंगा। अमरजीत कहते हैं कि ऐसी कोई दुश्मनी या रंजिश भी नहीं नजर आ रही जिस कारण सुखविंद्र ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।

अखाड़ा हत्याकांड : जिंदा बचे कोच अमरजीत बोले, राक्षस है सुखविंद्र, भगवान भी माफ नहीं करेगा
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कोच अमरजीत अस्पताल से सीधे अपने अखाड़े में पहुंचे। 

रोहतक : अखाड़ा हत्याकांड में सुखविंद्र की गोली से जिंदा बचे कोच अमरजीत रविवार को अस्पताल से सीधे अपने अखाड़े में पहुंचे। भावुक हुए अमरजीत का कहना था कि सुखविंद्र राक्षस है। उसे भगवान भी माफ नहीं करेगा। कभी सोचा भी नहीं था कि उसने अपने पत्थर दिल में इतनी नफरत पाल रखी है।

अमरजीत का कहना है कि 7 बजकर 9 मिनट पर सुखविंद्र ने मुझे फोन किया और बताया कि अखाड़े वाले उसे निकाल रहे हैं। यहां कहासुनी हो गई और मेरे लिए अपने (मेहर सिंह) अखाड़े में ही बात कर लो। सुखविंद्र ने मिलने के लिए बुलाया, लेकिन मैं गया नहीं। इसके बाद 7 बजकर 48 मिनट पर फिर उसका फोन आया तो मैंने अपने दूसरे साथियों से बात की और एमकेजेके कॉलेज के पास उससे मिलने चला गया। सुखविंद्र ने यहां मुझे मुहं में गोली मार दी। बता दें कि गोली से घायल हुए कोच अमरजीत का इलाज गुरुग्राम के एक अस्पताल में चल रहा था। रविवार को उन्हें वहां से छुट्टी मिली। अमरजीत घर बजाय सीधे अखाड़े में ही आए, उनका कहना था कि यही मेरा परिवार है। यहां सभी से मिलने के बाद ही घर जाऊंगा। अमरजीत कहते हैं कि ऐसी कोई दुश्मनी या रंजिश भी नहीं नजर आ रही जिस कारण सुखविंद्र ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।

चिल्लाया था सुखविंद्र कोच साहब... मनोज अर उसके साथियां नै तो मार आया...औरां नै भी ना छोडूं

अमरजीत बताते हैं जब मैं एमकेजेके कॉलेज के पास पुहंचा तो मेरी कार से कुछ ही दूरी पर सुखविंद्र खड़ा था। इशारा करने पर वह मेरी कार के नजदीक आया। मैंने उसे कंडक्टर साइड से गाड़ी में अंदर आने के लिए कहा। जैसे ही मैं अंदर से कार का दरवाज खोलने लगा तो सुखविंद्र ने पिस्तौल निकाली और गोली मारते हुए जोर से चिल्लाया कि कोच साहब... मनोज अर उसके साथियां नै तो मार आया...औरां नै भी ना छोडूं। गोली लगने के बाद मैं गाड़ी से बाहर भागा और तेज गति से एक सड़क को पार कर गया। दूसरी सड़क पार करने लगा तो एक कार से टकरा गया। मैं सोच रहा था कि सुखविंद्र मेरा पीछा कर रहा, सड़क पर गिरने के बाद मुडकर देखा तो सुखविंद्र पीछे नहीं था। वह अपनी कार से फरार हो गया था। फिर मैं अस्पताल की ओर भागा और अपने साथियों को फोन किया। इसके बाद मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

इसलिए बच गई जान

अमरजीत बताते हैं कि जब मैं ड्राइवर सीट पर बैठकर अंदर से ही दूसरी खिड़की खोल रहा था तो बाहर खड़े सुखविंद्र ने हथियार निकाला। हथियार दिखते ही मैं झटके से पीछे हटा, इतने में सुखविंद्र ने गोली चला दी। सुखविंद्र ने तो मेरे सिर को ही निशाना बनाया था, लेकिन झटके से पीछे हटने के कारण गोली मुहं में लगी और आरपार होते हुए कार के शीशे में लगी। तभी मैं भाग खड़ा हुआ। इस कारण मेरी जान बच गई। सुखविंद्र ने तो मारने का पूरा प्लान बनाया था, लेकिन भगवान का शुक्र है कि गोली सिर में नहीं लगी।

सरताज का नाम आते ही आंखे भर आई

अमरजीत जब वारदात के बारे में बता रहे थे सरताज का नाम आते ही उनकी आंखें भर आई। अमरजीत ने बताया कि मैं शाम को अखाड़े में आता था तो नन्हें सरताज को उसकी मां के साथ अखाडे में जाते देखता था। साक्षी उसे लेकर जाट कॉलेज के पास ही घूमने आती थी। सरताज ने सुखविंद्र का क्या बिगाड़ा था, उसे भी गोली मार डाली।

मर्डर के बाद एक घंटा आसपास ही था सुखविंद्र

अमरजीत से बातचीत के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अखाड़े में पांच लोगों की हत्या करने के बाद सुखविंद्र करीब एक घंटा आसपास ही घूमता रहा। हत्याकांड के बाद उसने 7 बजकर 9 मिनट पर अमरजीत को फोन किया। यह बात भी स्पष्ट नहीं कही जा सकती कि पहला फोन अखाड़े में वारदात से पहले किया या बाद में। अमरजीत के अनुसार सुखविंद्र का दूसरा फोन 7 बजकर 48 मिनट पर आया। इसके बाद अमरजीत एमकेजेके कॉलेज के पास भी पहुंचे और उन्हें गोली भी मारी गई। यह भी हो सकता है कि सुखविंद्र ने अमरजीत को भी अखाड़े में मारना चाहता हो।

2001 से एक साथ थे हम

अमरजीत बताते हैं कि मैं और सुखविंद्र 2001 में जींद जिले के गांव निडानी में चौधरी भगत सिंह मेमोरियल स्पोर्ट स्कूल के छात्र रहे। सुखविंद्र मुझसे जूनियर था। वह शुरू से ही अनुशासनहीन था। 2008 में हम दोनों मेहर सिंह अखाड़े में आ गए। यहीं रहते-रहते सुखविंद्र और सतीश ने एनआईसी किया। इसके बाद उन्हें यहीं अखाड़े में कोच बना दिया गया। सुखविंद्र गुटबाजी करता था, प्रैक्टिस करवाने में भी उसकी शिकायत आने लगी तो 2017 में उसे यहां से निकाल दिया गया था। इसके बाद वह जाट कॉलेज के पीछे अखाडेÞ में कोचिंग देने लगा था। वहां भी किसी बात को लेकर उसकी अनबन हो गई थी।

कुश्ती पर कलंक लगाया

अमरजीत कहते हैं कि आज तक के कुश्ती के इतिहास में इतना बड़ा कांड कभी नहीं हुआ। सुखविंद्र ने कुश्ती के खेल पर कलंक लगाया है। पुलिस और प्रशासन हमार पूरा सहयोग कर रहा है। वारदात और षड़यंत्र में कौन-कौन शामिल हैं पुलिस इसकी जांच कर रही है। इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।

ये है मामला

जाट कॉलेज के पीछे अखाड़े में 12 फरवरी को कोच मनोज, उनकी पत्नी साक्षी, प्रदीप, सतीश और खिलाड़ी पूजा को गोलियों से भूनकर मार डाला था। जबकि कोच अमरजीत और मनोज के तीन साल के बेटे सरताज को भी गोली मार गई थी। वारदात के तीन दिन बाद सरताज की मौत हो गई थी। अमरजीत का इलाज गुरुग्राम में चल रहा था।

रिमांड पर है सुखविंद्र

पुलिस ने सुखविंद्र को तीन दिन पहले फिर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। उससे वारदात वाली रात रुकने की जगह और अन्य कई खुलासे करवाने हैं। उसके साथ फोन पर ज्यादा बातचीत करने वाले लोगों की ट्रेसिंग भी की जा रही है।

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