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पुलिस में पदोन्नति की व्यवस्था होगी सेंट्रलाइज्ड, अब प्रमोशन में नहीं होगी बंदर-बांट

गृहमंत्री अनिल विज ने एडीजीपी प्रशासन, आईटी और टेलीकाम एएस चावला को बुलाकर सभी को एक समान प्रमोशन दिए जाने को लेकर एक ड्राफ्ट जल्द से जल्द तैयार करने और सभी रेंज का एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार करने को कहा है।

पुलिस में पदोन्नति की व्यवस्था होगी सेंट्रलाइज्ड, अब प्रमोशन में नहीं होगी बंदर-बांट
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योगेंद्र शर्मा:चंडीगढ़

हरियाणा पुलिस में आने वाले समय में पदोन्नति की व्यवस्था सेंट्रलाइज्ड होगी और पूरे प्रदेश में पारदर्शी तरीके से सभी पुलिस कर्मियों की पदोन्नति की जाएगी। पुराने समय से चले आ रहे खेल पर भी रोक लग जाएगी क्योंकि राज्य की कई रेंज पदोन्नति के मामले में बहुत आगे हैं, वहीं कुछ रेंज के पुलिस कर्मियों के साथ में सौतेला व्यवहार हो रहा है। इस संबंध में कई बार प्रतिनिधि मंडल लेकर प्रमोशन में भेदभाव की शिकायतों को लेकर पुलिस कर्मियों के परिजनों ने गृहमंत्री अनिल विज से मुलाकात कर कईं बार अपना दुखड़ा रोया था।

ब्ल्यू प्रिंट तैयार करने के लिए कहा

पूरे मामले में गंभीरता दिखाते हुए गृहमंत्री अनिल विज ने एडीजीपी प्रशासन, आईटी और टेलीकाम एएस चावला को बुलाकर सभी को एक समान प्रमोशन दिए जाने को लेकर एक ड्राफ्ट जल्द से जल्द तैयार करने और सभी रेंज का एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके पहले भी गृहमंत्री एक जैसी व्यवस्था के हिमायती रहे हैं। आने वाले दिनों में पदोन्नति का इंतजार करने वाले पुलिस कर्मिय़ों को जहां पदोन्नति का तोहफा मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ आने वाले वक्त के लिए एक जैसी व्यवस्था भी बन जाएगी।

खुद मुख्यमंत्री दे चुके नसीहत

खुद सूबे के सीएम मनोहरलाल इस तरह की असमानता को लेकर बेहद ही गंभीर हैं। उन्होंने इस वर्ष 2017 के दौरान पुलिस एक्ट में अहम बदलाव इसी कारण कराए थे। जिनका मकसद व्यवस्था को पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड करना था। लेकिन एसआई के पद पर सीधी भर्ती होने और डायरेक्ट भर्ती का पचास फीसदी कोटा होने के कारण भी कईं तरह से तकनीकी दिक्कत आती हैं। आंकड़ों पर गौर करें, तो दो साल में हुए 8 सौ एसआई भर्ती हुए हैं। दो साल में हर साल चार-चार सौ एसआई भर्ती हुए हैं। एसआई का पदोन्नति में भी पचास फीसदी कोटा निर्धारित है। अर्थात पांच साल के बाद में सीधी भर्ती से आने वाले कर्मियों को प्रमोशन मिल जाती है, दूसरों के लिए प्रमोशन से आने वालों को यह आठ साल के बाद में मुश्किल से मिल पाती है।

अंबाला और रेवाड़ी रेंज में कई तरह की चुनौतियां

हरियाणा की अंबाला और रेवाड़ी रेंज में सबसे ज्यादा दिक्कत आई हैं। दूसरी तरफ जहां जहां पर भी नई पुलिस कमिश्नरी गठित की गईं वहां पर कर्मियों को बेहद तेजी के साथ में प्रमोशन मिली हैं। अर्थात एक साथ लगे कुछ पुलिस कर्मी तो जहां अभी तक भी बतौर सिपाही, एएसआई, एसआई काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके साथियों की बात करें, तो कुछ मुख्य सिपाही से लेकर एएसआई, एसआई और निरीक्षक तक भी बन गए हैं। इसके विपरीत बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों के पदोन्नति मामले में पिछड़ गए थे। इस बात से परेशान कर्मियों के परिजन गृहमंत्री अनिल विज के पास पहुंचकर लिखित में अपनी पीड़ा दे चुके हैं। आरोप है कि अंबाला और रेवाड़ी रेंज के साथ में ज्यादा भेदभाव हुआ है। इन मामलों में मुख्य सिपाही से लेकर एएसआई, एसआई और उसके ऊपर के भी कुछ मामले हैं।

पुलिस एक्ट में संशोधन के बाद भी खामियां

भेदभाव से बचने के लिए पुलिस एक्ट में संशोधन 2017 किया था। जिसके बाद में पूरे प्रदेश के उपनिरीक्षकों व निचले पदों से पदोन्नति पाने, इसके ऊपर पदोन्नति में किसी भी तरह का कोई भेदभाव अथवा जुगाड़ के बल पर पहले पदोन्नति नहीं पायी जा सकेगी। लेकिन इस संशोधन के बाद भी अभी कुछ खामियां पुलिस कर्मी गिनवा रहे हैं। एक्ट 2017 में संशोधन में पहले की भर्ती हुए कर्मियों (नीचे से प्रमोशन पाने वाले) उसके लिए पांच साल पदोन्नति के लिए रखे थे। इसमें बदलाव कर अगर जिसे तीन साल कर दिया जाए, तो सिस्टमको पटरी पर लाया जा सकता है। दूसरा अहम बिंदु पुलिस में सभी रेंज में पचास फीसदी कोटा डायरेक्ट भर्ती होने वाले एसआई का कोटा है, जिसको घटाना बेहद जरूरी है। अगर कोटे को घटाकर कम कर दिया जाए, तो विभाग में सेवा करने वालों में संतुलन बैठाया सकता है।

कोई भतीजावाद नहीं : विज

गृह मंत्री अनिल विज का कहना है कि इस सरकार में कोई भाई भतीजावाद, क्षेत्रवाद नहीं होगा। इतना ही नहीं पारदर्शी और समयबद्ध तरीके सभी की पदोन्नति सभी को मिले इस दिशा में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस क्रम में हम जल्द ही एक एक सेंट्रलाइज्ड मानीटरिंग सिस्टम डवलप करने जा रहे हैं।

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