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जीएसटी क्षतिपूर्ति : प्रदेश को मिले 236.93 करोड़

हरियाणा को जीएसटी राजस्व की क्षतिपूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने 14वीं किश्त के रूप में 236.93 करोड़ की धनराशि मिली है। हरियाणा को अब तक क्षतिपूर्ति के लिए 3646.77 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है जो जीडीपी के 0.50 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण के रूप में 4293 करोड़ की अनुमति के अलावा होगी।

जीएसटी क्षतिपूर्ति : प्रदेश को मिले 236.93 करोड़
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हरियाणा को जीएसटी राजस्व की क्षतिपूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने 14वीं किश्त के रूप में 236.93 करोड़ की धनराशि मिली है। हरियाणा को अब तक क्षतिपूर्ति के लिए 3646.77 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है जो जीडीपी के 0.50 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण के रूप में 4293 करोड़ की अनुमति के अलावा होगी।। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जीएसटी मुआवजे को पूरा करने के लिए राज्यों को 6000 करोड़ रुपये की 14वीं किश्त जारी की है।

जीएसटी राजस्व के राज्यों को हुए नुकसान की भारपाई करने के लिए वित्त मंत्रालय इस क्षतिपूर्ति के लिए अब तक 23 राज्यों को 84 हजार करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर चुका है। यह धनराशि राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को उधारी के रूप में 106830 करोड़ रुपये की राशि की अनुमति अलग होगी। इसमें हरियाणा राज्य को चौदहवीं किश्त में मिले 236.93 करोड रुपये के साथ ही अब तक जीएसटी राजस्व की क्षतिपूर्ति के लिए 3646.77 करोड रुपये की जारी हो चुकी यह राशि राज्य को जीएसडीपी की 0.50 प्रतिशत की अतिरिक्त ऋण की अनुमति के अलावा रहेगी।

इसी प्रकार जीएसटी राजस्व की क्षतिपूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को इस किश्त में 169.26 करोड़ जारी किये गये जिसके साथ इस राज्य को 1523.34 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं जबकि छत्तीसगढ़ को जीडीपी के बराबर 0.50 फीसदी रकम को उधार के रूप में जुटाने के लिए 1792 करोड़ रुपये की अनुमति है।

वहीं मध्य प्रदेश को जीएसटी राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए 14वीं किश्त के रूप में जारी 247.33 करोड़ के साथ अब तक 3806.03 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। केंद्र सरकार की तरफ से मध्य प्रदेश को जीएसटी के आधार पर 4746 करोड़ रुपये की उधारी लेने की अनुमति दी जा चुकी है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार विशेष उधारी खिड़की के तहत अब तक जारी 84 हजार करोड़ रुपये की रकम पर केंद्र सरकार को औसतन 4.7395 फीसदी का ब्याज चुकाना होगा। केंद्र सरकार जीएसटी लागू करने में आई राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए यह कर्ज लेने के अलावा राज्यों को अपने सकल घरेलू उत्पाद का 0.50 फीसदी अतिरिक्त राशि के रूप में उधार लेने का भी विकल्प दे रही है। इसके लिए राज्य विकल्प-1 का चयन कर रहे हैं। इसके तहत 28 राज्यों को 106830 करोड़ (राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद का 0.50 फीसदी) की अतिरिक्त उधारी का भी प्रावधान किया गया है।

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