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आपके बच्चे के शरीर पर बनते हैं नीले निशान तो हो सकती है यह गंभीर बीमारी

रोहतक पीजीआई शिशु रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका यादव ने बताया कि अगर बच्चे के शरीर में नीले निशान बनते हैं, नाक से खून बहता है, आंख के अंदर से खून निकलता है या जोड़ों में सूजन की समस्या है और चोट लगने पर खून का रिसाव बंद नहीं होता तो सावधान होने की जरूरत है।

आपके बच्चे के शरीर पर बनते हैं नीले निशान तो हो सकती है यह गंभीर बीमारी
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 हिमोफिलिया बीमारी के बारे में जागरूक करतीं प्रोफेसर डॉ. अलका यादव और अन्य डॉक्टर।

हरिभूमि न्यूज : रोहतक

रोहतक पीजीआइ की चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी में शनिवार को हीमोफीलिया जागरूकता एवं पोस्टर अभियान चलाया गया। इसमें पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में शिशु रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका यादव ने बताया कि अगर आपके बच्चे के शरीर मे नीले निशान बनते हैं, नाक से खून बहता है, आंख के अंदर से खून निकलता है या जोड़ों में सूजन की समस्या है और चोट लगने पर खून का रिसाव बंद नहीं होता तो सावधान होने की जरूरत है।

कारण ये है कि बच्चे को हीमोफिलिया की शिकायत हो सकती है। डॉ. अल्का ने बताया कि हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है और वे संस्थान में इस दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करते हैं। इस बार करोना महामारी को देखते हुए सिर्फ पोस्टरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया है। हिमोफिलिया अनुवांशिक बिमारी है। यह सिर्फ लडकों में होती है और लड़कियां इसकी कैरियर होती हैं।

डॉ. अल्का ने बताया कि उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को फैक्टर 8 व फैक्टर 9 लगता है उनमें इन्हीबिटर बनने के कारण फैक्टर 8 व 9 का असर नहीं आ पाता और बार-बार ये टीके लगने से उनका असर भी खत्म होना शुरू हो जाता है और मरीज को हाईडोज के टीके लगाने पड़ते हैं। उनके पास करीब 300 हीमोफिलिया के मरीजों का रजिस्ट्रेशन है और प्रतिदिन पुराने ई-ब्लॉक मेंं सुबह नौ से शाम 4 बजे तक हीमोफिलिया के मरीजों को डे-केयर इलाज प्रदान किया जाता है। प्रोफेसर डॉ. अलका यादव ने बताया कि हीमोफिलिया से पीडि़त मरीज सामान्य जीवन व्यतीत करते हुए अच्छे पदों पर भी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जोडों पर सूजन आने पर इलाज और बचाव के उपाय भी बताए। डॉ. अल्का ने बताया कि किस प्रकार मरीज की स्थिति को देखते हुए कौन सी दवा कितनी मात्रा में देनी चाहिए और हीमोफिलिया के इलाज में क्या नवीनतम तकनीक आई है।

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