Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

शंभू भद्रा का लेख : बेहतर रिश्‍ते कायम रखेंगे बाइडेन

अमेरिकी जनता ने राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को हराकर जो बाइडेन को अमेरिका की कमान सौंप दी है। असल सवाल है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन का भारत पर क्‍या असर पड़ने वाला है। अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे डेमोक्रेट नेता जो बाइडेन भी भारत के लिए नए नहीं हैं। वे पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के समय उप राष्‍ट्रपति के तौर पर कई प्लेटफॉर्म्स पर भारत का पक्ष लेते रहे हैं। जो बाइडेन ही थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का अधिकृत समर्थन किया था। उम्‍मीद की जानी चाहिए कि ट्रंप के साथ में राउडी मोदी व अहमदाबाद में रैली का असर भारत के प्रति बाइडेन की नीति पर नहीं पड़ेगा।

शंभू भद्रा का लेख : बेहतर रिश्‍ते कायम रखेंगे बाइडेन
X

शंभू भद्रा

अमेरिका ने परिवर्तन को चुना, बड़बोले डोनाल्‍ड ट्रंप से पीछा छुड़ा लिया, अनुभवी और स्‍टेटसमैन जोसफ रोबिनेट बाइडेन को कमान सौंप दी है। अमेरिकी इतिहास में लंबे अर्से के बाद ऐसा समय आया कि किसी राष्‍ट्रपति को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला। नहीं तो जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा को दो-दो कार्यकाल मिले। ट्रंप भी उम्‍मीद लगाए बैठे थे कि उन्‍हें भी दो कार्यकाल मिलेंगे, पर अमेरिकी जनता बहुत जल्‍द उब गई। असल सवाल है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन का भारत पर क्‍या असर पड़ने वाला है। अमेरिका में दो दलीय व्‍यवस्‍था है। संयोग से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों की सरकार के समय अमेरिका व भारत के संबंध अच्‍छे रहे हैं। क्लिंटन, बुश, ओबामा और ट्रंप के समय भारत के संबंध यूएस से बेहतर बने रहे, इसलिए कश्‍मीर पर अपने बयान को लेकर चर्चा में रहे अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्‍ट जो बाइडेन के कार्यकाल में भी भारत व अमेरिका के संबंध मजबूत रहने के आसार हैं।

हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत के बिना अमेरिका आगे नहीं बढ़ सकता। चीन कभी भी अमेरिका के लिए भरोसेमंद नहीं रहा है। लगभग दो दशक से अमेरिका की एशिया कूटनीति भारत केंद्रित रही है, वह पाकिस्‍तान से धीरे-धीरे पीछा छुड़ाता गया है। लोकतंत्र के नाते भी व बड़े बाजार व सामरिक स्थिति के नाते भी भारत अमेरिका के लिए स्‍वाभाविक पार्टनर है। डोनाल्ड ट्रंप को करारी मात देकर अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे डेमोक्रेट नेता जो बाइडेन भी भारत के लिए नए नहीं हैं। वे पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के समय उप राष्‍ट्रपति के तौर पर कई प्लेटफॉर्म्स पर भारत का पक्ष लेते रहे। जो बाइडेन ही थे, जिन्होंने अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का अधिकृत समर्थन किया था। जिस गति से ओबामा प्रशासन ने भारत से रिश्तों को आगे बढ़ाया, उसी गति से ट्रंप भी उन्हें आगे लेकर गए। 2000 के बाद से अमेरिका के भारत को लेकर रुख में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। फिर चाहे अमेरिका में रिपब्लिकन प्रेसिडेंट हो या डेमोक्रेट। क्लिंटन से शुरू होकर जॉर्ज बुश के बाद ओबामा और ट्रंप ने भी भारत से रिश्तों को मजबूती दी। अब बाइडेन इसे आगे लेकर जाएंगे। बराक ओबामा प्रशासन में उप-राष्‍ट्रपति बनने से पहले से बाइडेन भारत के साथ मजबूत रिश्तों की पैरवी करते रहे हैं। सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी के चेयरमैन और उसके बाद वाइस-प्रेसिडेंट रहने के दौरान उन्होंने भारत के साथ मजबूत स्ट्रैटजिक भागीदारी बढ़ाने की बात कही थी।

2006 में बाइडेन ने कहा था कि 2020 की मेरे सपने की दुनिया में अमेरिका और भारत सबसे नजदीकी देश है। 2008 में भी जब भारत-अमेरिका परमाणु करार पर सीनेटर ओबामा हिचक रहे थे, तब बाइडेन ने ही अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स को इसके लिए राजी किया। बाइडेन ने उप-राष्‍ट्रपति रहते हुए स्ट्रैटजिक क्षेत्रों में भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूती देने की बात हमेशा से की है। उनके ही कार्यकाल में अमेरिका ने भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया था। अमेरिका ने पहली बार किसी देश को यह स्टेटस दिया और वह भी भारत को। ओबामा प्रशासन के आखिरी दिनों में लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (लेमोआ) किया, जो मिलिट्री कोऑपरेशन के तीन फाउंडेशनल पैक्ट्स में से एक था। इसके बाद के दो एग्रीमेंट कॉमकासा (कम्युनिकेशन कंपैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट) और बेका (बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट) ट्रंप प्रशासन ने किए। बराक ओबामा और जो बाइडेन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ दिया।

एच-1 बी वीजा पर ट्रंप प्रशासन पर बेहद सख्त था। बाइडेन प्रशासन से उम्मीद है कि वह अमेरिका जाकर पढ़ाई, काम और रहने की सोच रखने वाले भारतीयों के लिए नरमी बरतेगा। बाइडेन ने अपने चुनाव अभियान में इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटजी पर तस्वीर साफ नहीं की है। भारतीय विदेश नीति का केंद्रीय फोकस इसी क्षेत्र पर है। इस क्षेत्र पर लगता है कि बाइडेन अंतराष्‍ट्रीय नियम-आधारित और व्यवस्था के अनुकूल फैसले लेंगे, जो भारत को केंद्र में रखकर लिए जाएंगे। अपने चुनाव अभियान के दौरान चीन के मुद्दे पर बाइडेन नरम रहे। अमेरिका में इस बात पर सहमति है कि चीन स्ट्रैटजिक राइवल और एक चेतावनी है। ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर खुलकर बोलता था, हो सकता है कि बाइडेन उतने वोकल न दिखाई दें।

भारत उम्मीद कर सकता है कि बाइडेन प्रशासन नियम के आईने में स्थिर इंडो-पेसिफिक रणनीति पर काम करेगा। पिछले 20 साल में अमेरिका के प्रत्येक राष्‍ट्रपति -बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प के साथ कई मुद्दों पर भारत के मतभेद रहे, लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों के संबंधों में मजबूती आई है। वह भारत से रिश्तों को मजबूती पर फोकस करता रहा है। इसका मतलब है कि भारत के साथ रिश्तों को लेकर अमेरिका में किसी एक पार्टी की सोच हावी नहीं होती। उम्मीद कर सकते हैं कि जो भी उसी जगह से रिश्ते आगे बढ़ाएंगे, जहां ट्रंप ने छोड़ा था। जो बाइडेन के आने से विश्‍व में अमेरिका की भूमिका फिर से बढ़ेगी। अमेरिकी संरक्षणवाद के चक्‍कर में ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिष्‍ठा को धूमिल की। ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध, क्‍लाइमेट करार से अलग होना, उत्तर कोरिया से तनाव, खाड़ी से सैनिकों की वापसी, डब्‍ल्‍यूएचओ समेत कई वैश्विक संस्‍थाओं से अलग होना, मुस्लिमों को लेकर सख्‍त रुख, मेक्सिको के साथ तनातनी, अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था में सुस्‍ती, चीन से ट्रेड वार आदि कारण थे जो ट्रंप अमेरिका की महाशक्ति की छवि को बिगाड़ रहे थे। बाइडेन इन कमियों को दूर करेंगे।

हालांकि मानवाधिकार के नाम पर कश्‍मीर पर दिए बाइडेन के बयान के बाद की स्थिति को लेकर भारत को सतर्क रहने की भी जरूरत है। चुनाव प्रचार के दौरान बाइडेन ने ट्रंप प्रशासन के प्रवासी विरोधी नीतियों पर दोबारा विचार करने का वादा किया था। बाइडेन रोहिंग्या व चीन में उइगर मुसलमानों के लिए भी हमेशा आवाज़ उठाते रहे हैं। इस साल जून में बाइडेन ने कहा था कि कश्मीरियों के सभी तरह के अधिकार बहाल होने चाहिए। उन्होंने भारत के सीएए व एनआरसी को लेकर चिंता जाहिर की थी। उपराष्‍ट्रपति इलेक्‍ट कमला हैरिस भी मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की तीखी आलोचना के लिए पहचानी जाती हैं।

उम्‍मीद की जानी चाहिए कि ट्रंप के साथ में राउडी मोदी कार्यक्रम व अहमदाबाद में रैली का असर भारत के प्रति बाइडेन की नीति पर नहीं पड़ेगा। बाइडेन व कमला हैरिस के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के संबंध नए मुकाम हासिल करेंगे। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Next Story