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भिवानी के डॉक्टर ने इजाद की तकनीक : नाक में फंसी वस्तुओं को निकालना हुआ आसान

नाक,कान व गला रोग विशेषज्ञ डा. रूपेंद्र रंगा ने नाक से फोरन बॉडी(बाहर वस्तु) निकालने की नई तकनीक रंगाज हुक इजाद किया है। अमेरिका के जरनल ओटो लैरिंगोलॉजी ओपन एसएस में शोध पत्र प्रकाशित कर दिया।

रंगाज हुक
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भिवानी : चिकित्सक द्वारा तैयार करवाया गया रंगाज हुक।

हरिभूमि न्यूज : भिवानी

छोटी कांशी ने खेलों व शिक्षा के बाद चिकित्सा जगत में भी बुलंदियों के झंडे गाड दिए है। शहर के नाक,कान व गला रोग विशेषज्ञ डा. रूपेंद्र रंगा ने नाक से फोरन बॉडी (बाहर वस्तु) निकालने की नई तकनीक रंगाज हुक इजाद किया है। हुक के जरिए उन्होंने करीब 1156 लोगों के नाक में फंसी विभिन्न छोटी वस्तुओं को निकालकर नई तकनीक पर सफलता की मोहर लगाकर रिसर्च पेपर तैयार किया है। उक्त रिर्सच पेपर की गूगल पर ऐसी धूम मची की। अमेरिका के जरनल ओटो लैरिंगोलॉजी ओपन एसएस में शोध पत्र प्रकाशित कर दिया।

वहां के चिकित्सकों ने भी इस शोधपत्र में रंगाज हुक के बारे में बताई गई खूबियों को परखा व जांचा। उसके बाद वहां कि चिकित्सकों का डा. रूपेंद्र रंगा को बधाई देने वालों का तांता लग गया। डा. रूपेंद्र रंगा ने बताया कि उक्त उपकरण बनवाने के बाद गूगल अपलोड कर दिया। जो कम्पनी बनाना चाहे बना सकती है। साथ ही उन्होंने अपने शोधपत्र में हुक की खूबियां भी दर्शा दी है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धी का श्रेय अपने गुरु एंव पीजीआईएमस के पूर्व विभागध्यक्ष डा. एसपीएस यादव को दिया। उन्हीं के मार्गनिर्देशन में उक्त रिसर्च पेपर को मूर्तरूप दिया है।

कैसे करता है रंगाज हुक कार्य

ईएनटी रोग विशेषज्ञ डा. रूपेंद्र रंगा बताते है कि इस हुक से नाक में फंसी कोई भी वस्तु को बिना आपरेशन के बड़ी आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। इस तकनीक से बड़ी मुश्किल से तीन से चार मिनट में वस्तु बाहर निकाली जा सकती। उन्होंने बताया कि पहले की तकनीक से नाक में फंसी वस्तु को निकालना बड़ा मुश्किल होता था। कई बार नाक में फंसी वस्तु सरक कर सांस की नली व उसके बाद फेफड़ों तक पहुंच जाती थी। उससे सांस लेने में बड़ी दिक्कत होती थी और कई बार जान भी जोखिम हो जाती थी। अब उक्त हुक से इस तरह के रिस्कों से बचा जा सकता है।

मूंगफली व भुने हुए चने से जान जोखिम में

चिकित्सक रूपेंद्र रंगा बताते है कि सबसे यादा नाक में फंसी मूंगफली का दाना, भुना हुआ चने से सबसे यादा जान जोखिम में होती। चूंकि इनका दाना फंसने के बाद नाक में फूलने लगता है और जिसकी वजह से नाक की दिवारें व सांस आना मुश्किल होने लगता है। इस प्रणाली से इन दोनों चीजों को बिना किसी ऑपरेशन के आसानी से निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि इनके अलावा नाक में बिंदी, विभिन्न फसलों के बीज, पटाखे का पीस, खिलौनों में डाले जाने वाले सेल फंस जाते है। अगर समय रहते इनको नहीं निकाला जाए तो जान तक जाने की जोखिम हो सकती है।

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