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लॉकडाउन में नौकरी गई तो बना गया ठग : लखनऊ में बैठकर रिटायर्ड डीजीपी समेत छह राज्यों के कई लोगों को ठगा

20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी करने के बाद आरोपित यूपी के बारांबाकी के पुरेवान तोरई निवासी शुभम दो दिन पहले अपने साथी राजकुमार के साथ साइबर थाना पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

लॉकडाउन में नौकरी गई तो बना गया ठग : लखनऊ में बैठकर रिटायर्ड डीजीपी समेत छह राज्यों के कई लोगों को ठगा
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पकड़े गए दोनों आरोपित।

हरिभूमि न्यूज. रेवाड़ी

उड़ीसा के रिटायर्ड डीजीपी से पौने चार लाख की ठगी के मामले में रेवाड़ी साइबर थाना पुलिस के हत्थे चढ़े यूपी के बारांबाकी के पुरेवान तोरई निवासी शुभम ने रिमांड के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शुभम ने आरोपित राजकुमार को अपना मोहरा बनाकर उसकी फर्जी आईडी से बैंक खाता खुलवाने के बाद एक-दो नहीं, बल्कि छह राज्यों में कई हाईप्रोफाइल लोगों को ठगने का काम किया। 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी करने के बाद वह दो दिन पहले अपने साथी राजकुमार के साथ साइबर थाना पुलिस के हत्थे चढ़ गया। शातिर ठग शुभम को पकड़ना इतना असान नहीं था, लेकिन पुलिस ने कई दिन लखनऊ में रात बिताने के बाद उसे काबू कर वारदातों का खुलासा किया है।

साऊथ रेंज रेवाड़ी साइबर थाना प्रभारी ऋषिकांत ने बताया कि 22 फरवरी को रिटायर्ड डीजीपी दीर्घपाल सिंह चौहान की शिकायत दर्ज करने के बाद ही पुलिस आरोपितों का सुराग लगाने में जुटी थी। शुरूआत में पुलिस के हाथ खाली थे, लेकिन पुलिस को जैसे ही आरोपितों के बैंक डिटेल की जानकारी मिली पुलिस ने बैंक से उनकी जानकारी जुटाई। बैंक अकाउंट के जरिए आरोपितों तक पहुंचने की कोशिश की तो पता चला कि आरोपित राजकुमार के नाम से फर्जी आईडी पर अकाउंट खुला हुआ है। उसके बाद पुलिस ने आधार कार्ड नंबर के जरिए तलाश की तो पुलिस राजकुमार तक पहुंच गई। बाद में पुलिस ने ठगी के मास्टर माइंड शुभम को भी काबू कर लिया। दोनों लखनऊ में ही किराये पर रह रहे थे।

लॉकडाउन में छूटी नौकरी तो बन गया ठग

पुलिस के अनुसार मास्टर माइंड शुभम काफी पढ़ा लिखा है। वह एग्रीकल्चर में बीएससी पासआउट होने के बाद दिल्ली में एक कंपनी में बतौर फिल्ड ऑफिसर काम करता था। इस कंपनी के जरिए ही आयुर्वेदिक दवा की सप्लाई होती थी। शुभम को दवाईयां खरीदने वाले अधिकांश लोगों की जानकारी होती थी। पिछले साल लॉकडाउन के चलते उसकी नौकरी चली गई। उसके बाद आरोपित लखनऊ जाकर रहने लग गया और यहां उसने पांचवीं पास आरोपित राजकुमार को मोहरा बनाकर उसकी फर्जी आईडी से पहले बैंक खाता खुलवाया और फिर लोगों के साथ ठगी कर इस खाते में नकदी डलवाता और उसे तुरंत ही निकलवा भी लेता। शुभम के पास काफी सारे लोगों का डाटा था, जिसके जरिए ही उसने लोगों से संपर्क कर इंश्योरेंस क्लैम का प्रलोभन देकर ठगना शुरू कर दिया।

नाम बदलकर करता था फोन

शातिर ठग शुभम हर व्यक्ति के पास अलग नाम से फोन कॉल करता था। फर्जी आईडी के जरिए उसने सिम खरीदे हुए थे। किसी भी व्यक्ति को ठगने के बाद वह सिम को तोड़कर फैंक देता था। रिटायर्ड डीजीपी को ठगते समय उसने खुद को हिमांशु बताया और फिर पौने चार लाख ठगने के बाद उस सिम को ही तोड़ दिया था। पुलिस के हाथ आरोपित शुभम का मोबाइल फोन लग गया है। पुलिस उससे सख्ताई से पूछताछ कर रही है। उसने अभी तक महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और यूपी में कई वारदातों का खुलासा किया है।

आरोपित शुभम काफी शातिर

आरोपित शुभम काफी शातिर है। उसने छह राज्यों में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया। आरोपित से एक रजिस्टर भी बरामद किया है, जिसमें उसने ठगने वाले लोगों की सूची भी बनाई हुई है। आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर संबंधित राज्यों को भी सूचित कर दिया गया है। -ऋषिकांत, साइबर थाना प्रभारी, रेवाड़ी।


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