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गृह मंत्री अमित शाह को चिट्‌ठी लिखेंगे बांगर के किसान, जानें क्यों

भाकियू जिलाध्यक्ष आजाद पालवां ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया था कि देश के गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान खुले मंच से कहते थे कि अगर भाजपा की 200 से कम सीट पश्चिमी बंगाल में आई तो वो राजनीतिक छोड़ देंगे, अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसी को लेकर अब किसान पत्र लिखेंगे।

गृह मंत्री अमित शाह को चिट्‌ठी लिखेंगे बांगर के किसान, जानें क्यों
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 खटकड़ टोल पर किसानों के धरने पर पहुंचे किसान।

हरिभूमि न्यूज : जींद (उचाना)

खटकड़ टोल के पास कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर किसानों का धरना जारी है। बुधवार को अध्यक्षता शीला जुलानी ने की। सांकेतिक भूख हड़ताल पर बलवान जींद, जयवीर जींद, श्रीराम फौजी कंडेला, जग्गड़ कंडेला, सिंगारा राम छापड़ा रहे। भाकियू जिलाध्यक्ष आजाद पालवां ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया था कि देश के गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार के दौरान खुले मंच से कहते थे कि अगर भाजपा की 200 से कम सीट पश्चिम बंगाल में आई तो वो राजनीतिक छोड़ देंगे, अपने पद से इस्तीफा देंगे। अब खुले मंच से लोगों के बीच दिए गए बयान के बारे में बांगर के किसान गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिख कर याद दिलाएंगे कि वो अपने पद से अब कब इस्तीफा दे रहे है।

पालवां ने कहा कि बढ़े बुजुर्ग कहते थे कि किसी की दुआ न ले सको तो हाय मत लो। भाजपा को किसानों, मजदूरों, गरीब वर्ग की हाय लग गई। पश्चिम बंगाल में पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा उनकी कैबिनेट के मंत्री, कई राज्यों के सीएम के अलावा हर बड़े नेता ने कोरोना कॉल में भी वहां पर प्रचार लाखों की भीड़ में किया। यहां पर भाजपा 100 पार भी नहीं कर पाई। टीएमसी पहले से अधिक सीटें लेकर सत्ता में आई। यूपी में हुए पंचायत के चुनाव में भी जो परिणाम आए है उसमें भाजपा को करारी हार मिली है। ये संकेत है कि अब किसान, मजदूर, गरीब तबके के लोग व्यवस्था परिवर्तन करने की तरफ चल पड़े है।

खेड़ा खाप प्रधान सतबीर बरसोला ने कहा कि किसान, मजदूर, गरीब वर्ग के लोगों का यह आंदोलन आज जन आंदोलन बन गया है। इस आंदोलन को तोड़ने की हर कोशिश सरकार की तरफ से हुई। हर कोशिश हर बार फेल हुई। किसान, मजदूर अपने हक की मांग को लेकर संयम, अनुशासन से धरना दे रहा है। जो तीनों कृषि कानून है वो पूरी तरह से किसान, खेती के लिए काले है। इन कानूनों को किसान नहीं चाहते थे क्यों इन कानूनों को लागू करने पर केंद्र सरकार तुली है। इससे केंद्र सरकार की मंशा पर प्रश्न चिन्ह् लगना संभाविक है।

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