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30 जून तक बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के कर्जदारों की नीलामी या कुर्की पर रोक

दादरी जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिखा यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समय चल रहे महामारी के दौर को देखते हुए उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित कर राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 30 जून तक बैंक किसी भी लेनदार के विरूद्ध संपत्ति की नीलामी या संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई नहीं करेंगे।

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हरिभूमि न्यूज : चरखी दादरी

हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय ने कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए आगामी 30 जून तक बैंकों व वित्तीय संस्थाओं की ओर से कर्जदारों पर की जाने वाली नीलामी या कुर्की की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

दादरी जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिखा यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समय चल रहे महामारी के दौर को देखते हुए उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित कर राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 30 जून तक बैंक किसी भी लेनदार के विरूद्ध संपत्ति की नीलामी या संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई नहीं करेंगे। सरकार को जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन भी नगर परिषद या ग्राम पंचायत की जमीन पर कहीं कब्जा छुड़वाए जाने, इमारत को गिराने या घेराबंदी करने की कार्रवाई नहीं करेगी। उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी आरोपित की अंतरिम जमानत की याचिका पर अभी सुनवाई नहीं हुई है तो उसकी तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है। अदालत अपने विवेक से 30 जून के बाद इस प्रकार की याचिकाओं पर निर्णय दे सकती हैं।

इसी प्रकार सात साल तक के सजायाफ्ता कैदी को पैरोल दी गई है और उसकी मियाद खत्म हो रही है तो पुलिस, स्थानीय प्रशासन एवं अदालत उचित माने तो उसकी अवधि को तीस जून तक बढ़ाया जा सकता है। सात साल तक की सजा काट रहे पैरोल पर आए किसी भी बंदी को 30 जून तक पुलिस कानून व्यवस्था के संदर्भ में समझे तो उसे गिरफ्तार करना जरूरी नहीं है।

प्राधिकरण सचिव शिखा यादव ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि सिविल कोर्ट के किसी मामले में वादी या प्रतिवादी पक्ष को कोई जवाबदावा प्रस्तुत करना है तो वह 30 जून के बाद कर सकता है। उल्लेखनीय है कि जेलों में कोविड के मामलों की रोकथाम के लिए सात साल तक की सजा काट रहे बंदियों को भी पैरोल देने में राहत प्रदान की गई है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार कोविड रोकथाम की जिलास्तरीय प्रबंधन समिति में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव को भी सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। कोरोना महामारी पर अंकुश लगाने, लोगों को जागरूक करने, मास्क लगाने व दो गज की दूरी का पालन करने तथा कोविड रोगियों को उचित दरों पर चिकित्सा सेवाएं मुहैया करवाने के प्रति हाईकोर्ट ने पहले ही अपने दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं।

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