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Bajrang Punia : पिता ने कहा था - मेरा बजरंग कभी खाली नहीं लौटता, घर में जलती रही अखंड ज्योति

देश के लिए पदक के प्रबल दावेदार बजरंग पूनिया के सेमीफाइनल में हार के बावजूद पिता बलवान सिंह पदक के लिए पूरी तरह आश्वस्त थे। उनकी जीत के लिए सुबह से ही दुआओं का दौर चल रहा था। घर से लेकर मंदिरों तक में बजरंग की जीत के लिए पूजा-अर्चना की गई।

Bajrang Punia : पिता ने कहा था - मेरा बजरंग कभी खाली नहीं लौटता, घर में जलती रही अखंड ज्योति
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बजरंग पूनिया की जीत के बाद बजरंग के पिता को कंधे पर उठाए युवा।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

कुश्ती में देश के नामचीन खिलाड़ियों में शामिल बजरंग पूनिया ( Bajrang Punia ) ने शनिवार को आखिरकार टोक्यो ओलंपिक में ( Tokyo Olympics ) कांस्य पदक पर कब्जा कर ही लिया। देश के लिए पदक के प्रबल दावेदार बजरंग पूनिया के सेमीफाइनल में हार के बावजूद पिता बलवान सिंह पदक के लिए पूरी तरह आश्वस्त थे। शनिवार को दोपहर बाद कुश्ती शुरू होने से कुछ देर पहले उन्होंने कहा था कि बजरंग कभी खाली नहीं लौटता। पिता ने एकतरह से खेल प्रेमियों से वादा किया था। इसके बाद बजरंग ने कुश्ती में विरोधी को एकतरफा मुकाबले में हराकर साबित कर दिया कि इसलिए ही बजरंग पदक के दावेदार थे। मुकाबला जीतते ही बजरंग के भाई हरेंद्र पूनिया रो पड़े। वे बस इतना ही बोला कि तपस्या पूर्ण हो गई।

बजरंग पूनिया की जीत के लिए सुबह से ही दुआओं का दौर चल रहा था। घर से लेकर मंदिरों तक में बजरंग की जीत के लिए पूजा-अर्चना की गई। बजरंग के घर के आंगन में बने मंदिर में दिनभर से अंखड ज्योति जल रही है। सुबह भी स्वजन ने पूजा-अर्चना की। स्वजन के साथ ही खेल प्रेमियों को भी उम्मीद थी कि बजरंग देश को कांस्य पदक जीतकर हार के गम को भुलाकर आएंगे बढ़ेंगे और खेल प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे। बजरंग ने ऐसा काम करके दिखाया। क्वार्टर फाइनल में जबरदस्त फाइट के बाद बजरंग सेमीफाइनल में हार गए थे जिससे उनकी स्वर्ण पदक की उम्मीद टूट गई। हालांकि स्वजन के साथ ही खेलप्रेमियों को उम्मीद थी कि बजरंग पदक जरूर जीतेंगे।

चिंता मत करो, देश खातिर मेडल त लावैगा एै

बजरंग के पिता बलवान सिंह ने कहा भी था कि बजरंग आज तक भी खाली हाथ नहीं लौटा है। देश की दुआएं उनके साथ है। उनका कहना है कि चिंता मत करो, देश खातिर मेडल त लावैगा एै। वहीं, बजरंग की मां ओमप्यारी ने कहा कि बेटे पर पूरा भरोसा था। बजरंग केवल कुश्ती के लिए जिया है। बचपन से लेकर जवानी तक उसने केवल कुश्ती को ही जिया है। दोस्त कृष्ण पहलवान ने कहा कि बजरंग बहुत मजबूत इच्छा शक्ति वाला इंसान है, यूं हार नहीं मानता। ऐसे में विश्वास था बजरंग पदक के साथ ही लौटेगा।

जीत की खुशी में फूटे पटाखे, बधाइयों का लगा तांता

बजरंग पूनिया की जीत के साथ ही खेल प्रेमियों ने उनके घर के बाहर पटाखे फोड़ कर जीत का जश्न मनाया। जमकर आतिशबाजी की गई। भारत माता के जयकारों से आसमां गूंज उठा। खेलप्रेमी ढोल की थाप पर जमकर थिरके। जीत के बाद भाजपा, कांग्रेस, जजपा सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि बजरंग के घर पर बधाई देने पहुंचे। खेल प्रेमियों ने कहा जिस अंदाज में बजरंग ने विरोधी को हराया है। ये पदक स्वर्ण से कम नहीं है। बजरंग के की जीत युवाओं को कुश्ती खेलने के लिए प्रेरित करेगी। वहीं, इस खेल से जुडे युवाओं में नई जान फूंकेगी।


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