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महम में सेना ने लिया साढ़े 31 एकड़ जमीन पर कब्जा

1967 से उस जमीन पर काबिज थे किसान, ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने दलबल के साथ की कार्रवाई। जमीन पर पिछले कई सालों से अदालत में केस विचाराधीन था।

महम में सेना ने लिया साढ़े 31 एकड़ जमीन पर कब्जा
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जमीन पर कब्जा करती आर्मी।

हरिभूमि न्यूज : महम

पुराना बाइपास पर ढ़ेरपाना के पास व बड़ेसरा रोड पर थल सेना ने साढ़े 31 एकड़ जमीन पर अपना कब्जा लिया है। बताया जा रहा है कि यह रक्षा मंत्रालय की जमीन है। इस स्थान को पहले लोग पड़ाव कहते थे। गुरुवार सुबह ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजकुमार शर्मा की निगरानी में जमीन की कब्जा कार्रवाई की गई। मौका पर थाना प्रभारी कुलबीर सिंह की अध्यक्षता में भारी पुलिस बल मौूजद रहा। जिसमें पुरुष व महिला पुलिस की मौजूदगी रही।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजकुमार शर्मा ने बताया कि 252 कनाल जमीन पर पिछले कई सालों से अदालत में केस विचाराधीन था। अब अदालत द्वारा इस जमीन पर सेना को कब्जा दिलाए जाने बारे निर्णय लिया गया है। उसके बाद अदालत के आदेशानुसार लगभग साढ़े 31 एकड़ जमीन पर कब्जा कार्रवाई की गई है। इसमें लगभग 24 एकड़ जमीन ढेरपाना के नजदीक तथा लगभग आठ एकड़ जमीन बडेसरा रोड पर थी। बताया जा रहा है कि कुछ जमीन पर रणधीर गोयत व कुछ जमीन पर लालजीराम के परिवार के लोग खेती करते हैं। इसमें कुछ कमरे व सर्विस स्टेशन भी बनाया गया था जो सेना द्वारा ध्वस्त किया गया। सेना द्वारा यहां पर अपने साइन बोर्ड लगाए गए हैं। जिसमें लिखा है कि यह जमीन रक्षा मंत्रालय की है। इसमें प्रवेश निषेध है। इसके अलावा सेना के जवानों ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जमीन के चारों ओर बंबू गाड कर निशान देही की गई। इसमें पुराना बाइपास सड़क व उसके पास बने तालाब के किनारे से जीटी रोड तक जमीन शामिल है।

शुरू में हुआ विरोध

सेना द्वारा कब्जा कार्रवाई शुरू करते वक्त इसका कास्तकारों द्वारा विरोध किया गया। लेकिन भारी पुलिस बल के होते उनकी एक न चली। जमीन के कास्तकार हरदीप सिंह का कहना था कि यह जमीन 1967 से लेकर अब तक वे रेंट पर लेकर उस पर खेती करते आ रहे हैं। असल यह जमीन देय शामलात है। जिसका किराया वे खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में जमा कराते रहे हैं। लेकिन अधिकारी उनकी एक नहीं सुन रहे हैं।

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