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किसान आंदोलन में एक और किसान की थम गई सांसें

दिल्ली कूच एलान के तहत गत 27 नवंबर को किसानों ने टीकरी बार्डर पर पड़ाव डाला था। तब से लेकर अब तक बीमारियों व अन्य कारणों के चलते डेढ़ दर्जन से अधिक किसानांे की मौत हो चुकी है।

किसान आंदोलन में एक और किसान की थम गई सांसें
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हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में एक और किसान की मौत होने का मामला सामने आया है। तबीयत बिगड़ने अथवा हृदयाघात की आशंका जताई जा रही है। असल कारण का खुलासा पोस्मार्टम रिपोर्ट आने के बाद हो पाएगा। फिलहाल शव को नागरिक अस्पताल में रखवा दिया गया है।

दरअसल, दिल्ली कूच एलान के तहत गत 27 नवंबर को किसानों ने टीकरी बार्डर पर पड़ाव डाला था। तब से लेकर अब तक बीमारियों व अन्य कारणों के चलते डेढ़ दर्जन से अधिक किसानांे की मौत हो चुकी है। सोमवार की सुबह एक और किसान की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।

इसकी पहचान करीब 35 वर्षीय बोहर सिंह निवासी गांव भिटीवाला मुक्तसर साहिब पंजाब के रूप में हुई है। बोहर सिंह कई दिनों से आंदोलन में शामिल था। वह टीकरी बार्डर पड़ाव में शामिल था। शनिवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई। साथी किसानों ने उसे संभाला और अस्पताल लेकर गए।

अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया गया। सरकार से लगातार तारीखें मिलने और आंदोलन के बीच लगातार जा रही जानों के कारण किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि काले कृषि कानूनों से परेशान होकर किसानों ने यह आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन में उनके काफी साथियों की शहादत हो चुकी है। सरकार को कम से कम शहीद होते किसानों पर तो ध्यान देना ही चाहिए।

जगीर का शव परिजनों को सौंपा

उधर, शुक्रवार की सुबह मृत अवस्था में मिले बुजुर्ग जगीर सिंह का शव शनिवार को परिजनों को सौंप दिया गया। दरअसल, संगरूर जिले के निवासी करीब 83 वर्षीय जगीर सिंह भी इस आंदोलन का हिस्सा थे। वीरवार की रात को वह खाना खाकर सोए थे लेकिन शुक्रवार की सुबह नहीं उठे। उनकी मौत की वजह भी हृदयघात बताई जा रही है।


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