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ड‍्यूटी पर श्रीनगर जाने के लिए बस के इंतजार में खड़े फौजी को एंबुलेंस ने राेंदा

बीरेंद्र अपना सामान फुटपाथ पर रखकर बस का इंतजार कर रहा था। एंबुलेंस उसे काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई जिससे उसकी मौत हो गई।

ड‍्यूटी पर श्रीनगर जाने के लिए बस के इंतजार में खड़े फौजी को एंबुलेंस ने राेंदा
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फौजी बीरेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए हिसार कैंट के सूबेदार जगतार सिंह व अन्य ग्रामीण।

उकलाना मंडी ( हिसार)

गांव मिर्चपुर निवासी सैनिक बीरेंद्र की निजी एंबुलेंस की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतक बीरेंद्र इस समय श्रीनगर में तैनात था और 19 फरवरी को उसे अपनी छुट‍्टी पूर्ण करके श्रीनगर लौटना था। वह एक गाड़ी कर सुरेवाला चौक आ गए जहां से बीरेंद्र को श्रीनगर के लिए बस पकड़नी थी। सुरेंद्र ने बताया कि वह और बीरेंद्र सुरेवाला चौक पर लगभग 1 बजकर 25 मिनट पर पंहुचे और बीरेंद्र अपना सामान फुटपाथ पर रखकर बस का इंतजार करने लगा। इतने में सुरेवाला चौक से निजी एंबुलेंस ने बीरेंद्र को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में एंबुलेंस उसे काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। हादसे के बाद एंबुलेंस चालक वाहन को मौके पर छोड़ भाग गया। राहगीरों की मदद से बीरेंद्र को हिसार के नागरिक अस्पताल ले गया जहां पर चिकित्सकों ने बीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी है।

2009 में सेना में भर्ती हुआ था बीरेंद्र

42 वर्षीय बीरेंद्र वर्ष 2009 में फौज में भर्ती हो गया था। वह 15 जनवरी को एक महीने की छुट्टी लेकर अपने घर आया हुआ था। उसकी छुट्टियां 15 फरवरी को पूरी हो गई थी। लेकिन बीमारी की वजह से वह 18 फरवरी को श्रीनगर जाने के लिए वीरवार रात को करीब 10 बजे अपने गांव के ही राजपाल की गाड़ी किराए पर कर सुरेवाला मोड़ पर जाने के लिए निकल लिए थे। गाड़ी चालक राजपाल उनको वहां पर छोड़कर वापस अपने गांव आ गया था। करीब एक बजे फोन आया कि फौजी वीरेंद्र की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। कोहरे के कारण एक एंबुलेंस चालक ने सड़क पर खड़े बीरेंद्र को सीधी टक्कर मार दी और एंबुलेंस चालक मौके से फरार हो गया। शुक्रवार को उसका पोस्टमार्टम करवाकर उसके शव को उसके परिजनों को सौंप दिया। हिसार कैंट से सूबेदार जगतार सिंह के नेतृत्व में उनके शव को उनके पैतृक गांव में लाया गया और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उसके बड़े बेटे अमन ने मुखाग्नि दी इस घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।



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