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DAP खाद का विकल्प : सिंगल सुपर फास्फेट डालकर बिजाई करें किसान, उत्पादन पूरा होगा और रुपये भी बचेंगे

बीते कई दिनों से प्रदेश के कुछ हिस्सों में डीएपी की किल्लत बनी हुई है। किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रहा है। नवम्बर में गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। ऐसे में डीएपी की मांग और आपूर्ति में अंतर होने की वजह से दिक्कतें और ज्यादा हो सकती हैं।

DAP खाद का विकल्प : सिंगल सुपर फास्फेट डालकर बिजाई करें किसान, उत्पादन पूरा होगा और रुपये भी बचेंगे
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सिंगल सुपर फास्फेट

हरिभूमि न्यूज : रोहतक

बीते कई दिनों से प्रदेश के कुछ हिस्सों में डीएपी की किल्लत बनी हुई है। किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रहा है। नवम्बर में गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। ऐसे में डीएपी की मांग और आपूर्ति में अंतर होने की वजह से दिक्कतें और ज्यादा हो सकती हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का कहना है कि अगर किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रहा है तो वे उसके स्थान पर एसएसपी ( सिंगल सुपर फास्फेट ) का प्रयोग करें। इससे भी फसल का उत्पादन पूरा होने का दावा कृषि विभाग का है।

बताया जा रहा है कि बाजार में बाजार में डीएपी 1200 रुपए और सुपर फास्फेट 380 रुपए प्रति बोरी के से मिल रहा है। रेट के बड़े अंतर को देखें तो एसएसपी डीएपी से काफी सस्ता भी है और आसानी से मिल भी रहा है। एक एकड़ में जहां डीएपी का एक कट्टा डालना पड़ता है। वहीं एसएसपी का डेढ़ बैग डालना पड़ेगा। डेढ बैग पर किसान को 470 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। जबकि डीएपी मुश्किल से मिलेगा और 1200 रुपये भी खर्च होंगे। प्रति एकड़ 730 रुपये की बचत होने के बारे में कृषि विभाग बता रहा है।

एसएसपी डालने का फायदा ही फायदा

कृषि विभाग के मुताबिक डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है। जबकि एसएसपी में 16 प्रतिशत फास्फोरस और 11 फीसदी सल्फर होता है। कृषि विभाग का कहना है कि जिस किसान ने सरसों की बिजाई करनी है, वे प्रति एकड़ एसएसपी का डेढ़ बैग डाल दें। इतनी मात्रा में खाद डालने के बाद फसल भरपूर होगी। विभाग ने बताया कि एसएसपी की इतनी मात्रा डालकर ही गेहूं की बिजाई की जा सकती है। कृषि विभाग का कहना है कि लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि नवम्बर में जब गेहूं की बिजाई जोर पकड़ेगी तो डीएपी की कमी नहीं होने दी जाएगी। अधिकारी बताते हैं तो एसएसपी डालकर सरसों की बिजाई करने से तो फसल में तेल की मात्रा भी बढ़ती है। क्योंकि इससे फसल में फफूंद नहीं लगती। जबकि डीएपी बीमारी को रोकने में कारगार नहीं होता।

गेहूं का रकबा ज्यादा

प्रशासन का कहना है कि जिले में डीएपी की कमी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन इस दावे में कितना दम है, इसके बारे में तो आने वाले दिनों में मालूम होगा। क्योंकि अब कुछ दिनों बाद गेहूं की बिजाई युद्धस्तर पर शुरू होनी है। सरसों बिजाई के दौरान डीएपी को लेकर जिले में डीएपी की कमी नहीं रही। हालांकि सांपला में एक-दो दिन संकट होने की बातें सामने आई थी। लेकिन बाकी स्थानों पर स्थिति सामान्य रही। आपको यहां भी बता दें कि जिले में सरसों की बिजाई मुश्किल से 10-12 हजार हेक्टेयर में होती है। जबकि गेहूं का रकबा हर साल एक लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा होता है। कृषि विभाग ने सरकार को 7500 मीट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी है। लेकिन अभी तक सरकार ने यह तय नहीं कर पाई है कि इस मांग के मुताबिक कब डीएपी पहुंचगा।

एसएसपी डीएपी से सस्ती पड़ेगी

डीएपी की कमी जिले में न हो। इसके प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। बावजूद इसके किसान डीएपी की जगह एसएसपी का प्रयोग करके सरसों और गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। किसानों को एसएसपी, डीएपी की बजाय सस्ता भी पड़ेगा। -डॉ. राकेश कुमार, गुण नियंत्रक निरीक्षक

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