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लॉकडाउन की मार के बाद किसान आंदोलन से हिलने लगी उद्योग जगत की नींव

किसान आंदोनल के चलते दिल्ली जाने का रास्ता बंद होने के साथ-साथ दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद होने का असर एक बार फिर स्थानीय उद्योगों के उत्पादन पर पड़ना शुरू हो गया है। जिससे फैक्ट्रियों में तैयार माल बाहर नही निकल पा रहा है तथा कच्चा माल फैक्ट्रियों तक पहुंच नहीं रहा है।

लॉकडाउन की मार के बाद किसान आंदोलन से हिलने लगी उद्योग जगत की नींव
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रेवाड़ी : किसान आंदोलन के चलते जाम में फंसे वाहन।

हरिभूमि न्यूज. रेवाड़ी (धारूहेड़ा)

क्षेत्र के उद्योग अभी तक लॉकडाउन की मार से पूरी तरह उभर भी नहीं पाए थे कि किसान आंदोलन ने एक बार फिर इंडस्ट्री की नींव हिलानी शुरू कर दी है। जिससे उद्योगों का उत्पादन गिरने के साथ वहां काम करने वाले श्रमिकों को एक बार फिर अपने सामने रोजी-रोटी की समस्या गहराती दिखाई देने लगी है।

मार्च माह में लगे लॉकडाउन से बंद हुई इंडस्ट्री अनलॉक तक होने के बाद धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी थी। इसी बीच किसान आंदोनल के चलते दिल्ली जाने का रास्ता बंद होने के साथ-साथ दिल्ली-जयपुर हाईवे बंद होने का असर एक बार फिर स्थानीय उद्योगों के उत्पादन पर पड़ना शुरू हो गया है। जिससे फैक्ट्रियों में तैयार माल बाहर नही निकल पा रहा है तथा कच्चा माल फैक्ट्रियों तक पहुंच नहीं रहा है। धारूहेड़ा की गिनती प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में होती है। उद्यमी धीरज सैनी का कहना है कि कोरोना काल में अनलॉक के बाद लगभग सभी फैक्ट्रियां शुरू हो गई थी। धीरे-धीर मांग के अनुसार उत्पादन होना शुरू हो रहा था, परंतु किसान आंदोलन के कारण मुख्य मार्ग बंद होने से स्थिति एक बार फिर कोरोना काल की तरह होने लगी है। किसानों के आंदोलन के कारण हरियाणा से पंजाब, हिमाचल, दिल्ली इत्यादि प्रदेशों में माल का आवागमन लगभग पूरी तरह से ठपहो गया है। तैयार माल भेजने के साथ-साथ कच्चा माल मंगवाने में परेशानी हो रही है। जिस कारण कई इंडस्ट्रियों ने एक शिफ्ट में उत्पादन करना शुरू कर दिया है। सरकार ने यदि जल्द समाधान नहीं किया तो देश की इंडस्ट्री इससे बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी।

30 से 50 प्रतिशत बढ़ी लागत

किसान आंदोलन के चलते ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। जैसे ही मीडिया में बंद की खबरे आती है तो दूसरे प्रदेशों से मिले आर्डर कैसिंल कर दिए जाते हैं। इतना ही नहीं धारूहेड़ा से बाहर रहने वाले कर्मचारियों का आवागमन भी मुश्किल होता जा रहा है।

कही देरी से तो कहीं पहुंच नहीं पा रहा मॉल

उद्यमियों का कहना है कि किसान आंदोलन के चलते पूरा सिस्टम डिस्टर्ब हो गया है। कहीं किसी ने किसी प्रकार दो से तीन दिन की देरी से माल पहुंचाया जा रहा है तो कई स्थानों पर तो पहुंच ही नहीं पा रहा है। कंटिन्यूस प्रोसेस वाले उद्योगों के संचालकों को सबसे ज्यादा चिंता हो रही है हाइवे जाम होने से माल आने जाने में देरी से उद्योगों की प्रोडिक्टिविटी पर सीधा असर पड़ रहा है।

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