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आखिर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर ही क्यों लाए जा रहे हैं Rafale Jet आइए जानते हैं जगुआर के बाद राफेल के लिए अंबाला ही क्यों हैं सबसे सही जगह

दुनिया के सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल राफेल Rafale Jet का सबसे पहला स्कवाड्रन अंबाला एयरबेस पर तैनात होगा। अगला स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाला के हाशिमारा में तैनात किया जाएगा। राफेल के सबसे पहले अंबाला में तैनात किए जाने के पीछे अंबाला एयरबेस का रणनीतिक महत्व भी है। अंबाला सामरिक दृष्टि से एक तरह से एयरफोर्स की रीढ है।

राफेल से बढ़ेगी वायुसेना की ताकत, लेकिन गेमचेंजर कहना जल्दबाजी
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राफेल विमान (प्रतीकात्मक फोटो)

धर्मवीर.अंबाला

अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल ( ) फ्रांस से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। करीब दो महीने की लंबी ट्रेनिंग के बाद भारतीय वायुसेना के पायलट 6 राफेल विमानों को फ्रांस से लेकर रवाना हो चुके हैं। बुध काम सुध को सार्थक करते हुए राफेल बुधवार को अंबाला एयरबेस पर लैंड कर जाएंगे। अगस्त में वायुसेना की ग्रैंड सेरेमनी के बाद इन्हे विधिवत भारतीय वायुसेना के सबसे मशहूर गोल्डन एरो स्कवाड्रन का हिस्सा बनाया जाएगा। दुनिया के सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल राफेल का सबसे पहला स्कवाड्रन अंबाला एयरबेस पर तैनात होगा। अगला स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाला के हाशिमारा में तैनात किया जाएगा। राफेल के सबसे पहले अंबाला में तैनात किए जाने के पीछे अंबाला एयरबेस का रणनीतिक महत्व भी है। आजादी के बाद देश के सबसे पहले फुल आॅपरेशनल अंबाला एयरबेस हमारे दो चुनौतीपूर्ण पड़ौसियों पाकिस्तान व चीन पर रणनीतिक कार्रवाई के लिए उचित दूरी पर है। दोनों ही देशों पर किसी भी तरह के टकराव में यहां से आधे घंटे की अवधि में जवाबी कार्रवाई का अंजाम दिया जा सकता है। इसके अलावा अंबाला एयरबेस तक पहुंचने के लिए दुश्मन को कई लेयर की सुरक्षा को बेध कर अंबाला तक पहुंचना होगा। ऐसे में बीच रास्ते में ही उसके विमानों को मार गिराया जा सकता है। पाकिस्तान की तरफ पठानकोट व चीन की तरफ सरसावा व अन्य जगहों पर वायुसेना की एयर डिफेंस कायम है।

1971 में दिखा था अंबाला का महत्व-1971 में अंबाला एयरबेस का महत्व पाकिस्तान को पता चल गया था। अंबाला से उड़े भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने लोगोंवाल पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी थी। इसके अलावा पाकिस्तान पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक में भाग लेने वाले विमानों की लैंडिंग में भी अंबाला एयरबेस का ही इस्तेमाल हुआ था।

सबसे पहले जगुआर भी यहीं तैनात हुए थे-राफेल से पहले भारतीय वायुसेना के सबसे डीप स्ट्राइकर लड़ाकू विमान माने जाने वाले जगुआर भी अंबाला में ही तैनात किए गए थे। बुल्स के नाम से महशूर ही जगुआर को 1979 में अंबाला तैनात किया था। 1981 में इसके 14 स्कवाड्रन ने अंबाला से विधिवत आॅपरेशन शुरू कर दिया था।

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