Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

हाईकाेर्ट की Celebrities को नसीहत : ऐसे शब्द ना बोलें, जिनका गलत अर्थ निकलता हो

आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कोर्ट ने अगली सुनवाई तक एफआइआर पर युवराज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

हाईकाेर्ट की Celebrities को नसीहत : ऐसे शब्द ना बोलें, जिनका गलत अर्थ निकलता हो
X
हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेलिब्रिटीज को नसीहत दी है कि वह ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में सावधानी बरतें, जिनकी गलत व्याख्या हो सकती है। हाईकोर्ट के जस्टिस अमोल रतन सिंह ने क्रिकेटर युवराज सिंह द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चैट करते हुए अनुसूचित जाति के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर दर्ज एफआइआर को रद करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणियां की हैं। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और विशेष रूप से सेलेब्रिटी को किसी भी शब्द के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए, जिसका गलत अर्थ निकाला जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान युवराज सिंह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील पुनीत बाली ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा मुकदमा भंगी शब्द के प्रयोग पर दर्ज करवाया है जबकि भंगी का मतलब नशीली भांग का सेवन करने वाला व्यक्ति होता है। वकील ने यह भी तर्क दिया था कि यह टिप्पणी संबंधित व्यक्ति (युजवेंद्र चहल) के संदर्भ में की गई थी। पिछले साल 20 अप्रैल को इंस्टाग्राम में युवराज और रोहित शर्मा की बात हो रही थी। बड़े ही हलके फुल्के और मजाकिया अंदाज में हो रही उस बातचीत में उन्होंने अन्य क्रिकेट खिलाडी युजविन्दर चहल और कुलदीप यादव को मित्रतापूर्वक ढंग से भंगी शब्द से संबोधित कर दिया था। उनका किसी समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करने की कोई मंशा नहीं थी। उसके दोस्त युजविन्दर चहल दलित समुदाय से नहीं थे। बावजूद इसके उन्होंने 5 जून को एक प्रेस बयान जारी कर इसके लिए माफी भी मांग ली थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस शब्द का अर्थ दो व्याख्याओं के अधीन है, अर्थात क्या इसका उपयोग किसी विशेष समुदाय के खिलाफ किया गया था। याची के साथी युजवेंद्र चहल के लिए जो अनुसूचित जाति से संबंधित नहीं है।

युवराज के वकील की तरफ से दलील दी गई कि 14 फरवरी को इसी मामले को लेकर हांसी के रजत कलसन ने हांसी पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज करवा दी । शिकायतकर्ता कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश कर चुका है और उसे ब्लैकमेल करना चाहता था। वैसे भी शिकायतकर्ता इस शिकायत को दर्ज करवाने का अधिकार ही नहीं रखता है । एक तो वह खुद इस समुदाय से नहीं है, दूसरा वह खुद इस मामले में पीड़ित नहीं है। इस पर शिकायतकर्ता के वकील अजुर्न श्योरण ने आरोपों से इनकार किया कि युवराज को नहीं जानता और इसलिए शिकायतकर्ता की ओर से पैसे की मांग करने के लिए उन्हेंं फोन करने का सवाल ही नहीं उठता। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने एफआइआर की जांच पर रोक लगाने से इंकार करते हुए सरकार को आदेश दिया कि वह जांच जारी रखे व चार सप्ताह के भीतर राजपत्रित अधिकारी द्वारा इस मामले की जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक एफआइआर पर युवराज के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई न करने का आदेश दिया है लेकिन यह जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इस मामले में अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

Next Story