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134-ए के दाखिलों में नई अड़चन : अब नौंवी से 11वीं तक एनरोलमेंट नहीं हो पाना बना सिरदर्द, स्कूल संचालकों ने खड़े किए हाथ

शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत भले ही निजी स्कूल देरी से ही सही, मगर दाखिला करने को तैयार हो गए हैं, लेकिन दाखिलों में आ रही अड़चनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीएसई दिल्ली बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों ने नौंवी व इससे ऊपर की कक्षाओं में इस नियम के तहत दाखिले देने में हाथ खड़े कर दिए हैं।

134-ए के दाखिलों में नई अड़चन : अब नौंवी से 11वीं तक एनरोलमेंट नहीं हो पाना बना सिरदर्द, स्कूल संचालकों ने खड़े किए हाथ
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 नियम 134ए

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत भले ही निजी स्कूल देरी से ही सही, मगर दाखिला करने को तैयार हो गए हैं, लेकिन दाखिलों में आ रही अड़चनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीएसई दिल्ली बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों ने नौंवी व इससे ऊपर की कक्षाओं में इस नियम के तहत दाखिले देने में हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि सीबीएसई बोर्ड द्वारा नौंवी कक्षा में एनरोलमेंट रजिस्ट्रेशन किया जाता है तथा यह कार्य काफी समय पहले ही पूरा होने के कारण अब पोर्टल बंद कर दिया गया है। ऐसे में वह दाखिला देने में बिल्कुल असमर्थक हैं। इतना ही नहीं, कई अभिभावकों को ऐच्छिक अलॉट स्कूल मिल गया है, लेकिन बच्चे को स्कूल आने-जाने के लिए कोई साधन नहीं है। इसलिए मजबूरन कदम पीछे हटाने पड़ रहे हैं।

शिक्षा नियम 134-ए के तहत गत मंगलवार को निजी स्कूल जहां चयनित बच्चों का दाखिला तैयार होने पर निराश अभिभावकों के चेहरों पर खुशी लौट आई थी, वही खुशी अब अनेक अभिभावकों के चेहरों से गायब हो गई है। खासकर उन अभिभावकों, जिनके बच्चे कक्षा नौंवी, दसवीं एवं ग्यारहवीं कक्षा में दाखिला लेना चाहते हैं। जब अभिभावक बच्चों को लेकर निजी स्कूल गए थे तो निजी स्कूल संचालकों ने उन्हें प्रवेश पत्र देते हुए उनके आवेदन स्वीकार कर लिए तथा सभी शेष औपचारिकताएं पूर्ण करने को कहा था। इस पर अभिभावक कहे अनुसार शपथ पत्र, आय प्रमाण पत्र एवं अन्य कमियों को दूर करने में लग गए। इसका परिणाम यह रहा कि कक्षा दूसरी से आठवीं तक के लगभग सभी बच्चों का दाखिला कर लिया गया, लेकिन इससे ऊपर की कक्षाओं नौंवी से ग्यारहवीं तक में नई अड़चन लग गई। निजी स्कूल संचालकों का साफ कहना था कि सीबीएसई बोर्ड ने नौंवी कक्षा से ही होने वाले एनरोलमेंट रजिस्ट्रेशन पहले ही कर चुका है तथा अब इसकी लेट फीस के साथ भी अंतिम तिथि गुजर चुकी है, जिस कारण अब वह दाखिला लेने में असमर्थ हैं।

इतना ही नहीं, जिन बच्चों को दाखिला मिल गया, उनमें से कई अभिभावकों से घर से स्कूल की दूरी गले का फांस बन गई। कईयों के घर से संबंधित निजी स्कूल आने-जाने के लिए बच्चों के पास कोई स्कूल बस या अन्य साधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोज-रोज बच्चे को स्कूल ले जाना और लाना उनके गले की फांस बन गया, जिस कारण मजबूरन वह अपने बच्चे को दाखिला कराने के बावजूद पीछे हटने को मजबूर हो गए हैं। अकेले नांगल चौधरी खंड में ही करीब 80 बच्चों को अभिभावकों ने ट्रांसपोर्ट अभाव में पीछे हटा लिया है। कईयों के पास अन्य कारण भी हैं, जो दाखिला मिलने के बावजूद कदम पीछे हटाने को मजबूर हो गए हैं।

यह बोले डीईईओ

नारनौल के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र श्योराण ने बताया कि फिलहाल एडमिशन का सही आंकड़ा 15 जनवरी के बाद ही मिल पाएगा, लेकिन नौंवी से ग्यारहवीं तक के बच्चों को एनरोलमेंट की वजह से दिक्कत आ रही है। इस मुद्दे को एसीएस डा. महावीर प्रसाद से वीडियो कांफ्रेसिंग वार्ता में हमने उनके सम्मुख रखा था, जिस पर उन्होंने सीबीएसई से अनुरोध करने का आश्वासन दिया था। ट्रांसपोर्ट में निजी स्कूल को बाध्य नहीं कर सकते है। यह व्यवस्था खुद अभिभावकों को करनी होगी।

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