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ANIL VIJ vs DGP MANOJ : नए डीजीपी की ताजपोशी के लिए 7 नामों का पैनल तैयार

गृहमंत्री के तल्ख तेवर के बाद एसीएस होम की ओर से यह पैनल तैयार कर अनिल विज के ऑफिस भेज दिया गया है। गुरुवार को यह तय है कि पैनल केंद्र को भेजा जाएगा।

ANIL VIJ vs  DGP MANOJ : नए डीजीपी की ताजपोशी के लिए 7 नामों का पैनल तैयार
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मंत्री अनिल विज और डीजीपी मनोज यादव।

योगेंद्र शर्मा. चंडीगढ़

आखिरकार हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज की नाराजगी का असर दिखने लगा है, हरियाणा के गृह विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा की ओर से नए डीजीपी की ताजपोशी के लिए 7 नामों का पैनल बनाकर तैयार कर लिया गया है। इतना ही नहीं गृहमंत्री के तल्ख तेवर के बाद एसीएस होम की ओर से यह पैनल तैयार कर गृह मंत्री अनिल विज के ऑफिस भेज दिया गया है। गुरुवार को यह तय है कि पैनल केंद्र को भेजा जाएगा, बुधवार को गृह मंत्री दिल्ली थे और चंडीगढ़ ऑफिस नहीं आए इसलिए अब नामों का पैनल गुरुवार को जाने की उम्मीद है।

2 दिन पहले ही प्रदेश के गृहमत्री अनिल विज नाराजगी जाहिर करने और नामों का पैनल भेजने के स्पष्ट आदेश के बाद में हरियाणा डीजीपी मनोज यादव की विदायी अब लगभग तय है। अप पूरे मामले में ढील और सुस्त चाल को देखते हुए अनिल विज ने अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा को वरिष्ठता क्रम में नामों का पैनल तैयार करने के साथ ही इसमें देरी नहीं होने कि साफ हिदायत दी थी। इतना ही नहीं वर्तमान डीजीपी मनोज यादव के 2 साल पूरे होने के बाद एक्सटेंशन दिए जाने को लेकर भी नाराज मंत्री अनिल विज ने इसे सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के विपरीत बताया था। था ध्यान में रखते हुए गृहमंत्री अनिल विज एसीएस होम को नए नामों का पैनल कुल मिलाकर गृहमंत्री की नाराजगी और नए पैनल में नाम भेजने मे हुई देरी को लेकर गृह मंत्री द्वारा लिखा गया पत्र सार्वजनिक में जाने के बाद मामला मीडिया की सुर्खियां बन गया है। यहां पर उल्लेखनीय है कि वर्तमान डीजीपी मनोज यादव का दो साल का कार्यकाल बीती 21 फरवरी को पूरा हो गया था, लेकिन उनको सरकार की ओऱ से अगले आदेश तक एक्सटेंशन दी गई थी। कुल मिलाकर गृह मंत्री पूरे मामले में खफा हैं, साथ ही नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपने के पक्ष में हैं। जिसके कारण आने वाले दिनों में डीजीपी की विदायी तय मानी जा रही है।

हरियाणा डीजीपी मनोज यादव का कार्यकाल दो साल के लिए तय था,इसके ठीक पहले ही नए डीजीपी की ताजपोशी को लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरु हो गया था। लेकिन पैनल में नए नाम नहीं जाने और इसमें देरी को लेकर गृहमंत्री विज खफा नजर आ रहे हैं। 21 फरवरी को उनका कार्यकाल पूरा होने के साथ ही अगले आदेशों तक उन्हें एक्सटेंशन मिली थी, जिसके पीछे कोविड की चुनौती और किसान आंदोलन सहित कईं बातें वर्तमान माहौल को ध्यान में रखते हुए अहम कारण बता जा रहे थे। सरकार की एक्सटेंशन कुछ समय के लिए थी गृह मंत्री अनिल विज चाहते थे कि जल्द ही नामों का पैनल भेज दिया जाए। अनिल विज सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को आधार मानते हुए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा से नए नामों का पैनल भेजने का आदेश जारी किया था। गृह मंत्री ने मंगलवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव को इस बारे में स्पष्ट आदेश किए थे। जिसके बाद से नए नामों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई और बुधवार को यह गृहमंत्री के ऑफिस तक पहुंच गई है। भी पहुंच गई है। वीरवार को गृहमंत्री चंडीगढ़ अपने ऑफिस में रहेंगे और यह तय माना जा रहा है कि कल यह लिस्ट केंद्र को भेज दी जाएगी।

नए नामों का पैनल भेजने की तैयारी

नए नामों का पैनल भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि इस पैनल में मेरिट के हिसाब से उपरोक्त नाम है। वर्तमान में नए नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग में भेजने क तैयारी के। जिन अफसरों के नाम इसमें जाने की उम्मीद है, उन सात अधिकारियों में पीके अग्रवाल, अकिल मुहम्मद और डाक्टर आरसी मिश्रा में डीजीपी बनना भी तय है। गृह मंत्री के आदेशों पर नामों का नया पैनल भेजा जाएगा, उसमें सात वरिष्ठ आईपीएस अफसरों के नाम शामिल होंगे। इनमें तीन डीजी रैंक के अफसर और चार एडीजी रैंक के अफसर नियम और सेवा शर्तों, अनुभव आदि में शामिल हो रहे हैं। डीजीपी के लिए तीस साल की सेवा अनिवार्य की गई है। दूसरी तरफ छह माह से ज्यादा का सेवा कार्यकाल बचा होना चाहिए। लिहाजा 1984 बैच एसएस. देसवाल और 1986 बैच के केके सिंधु दौड़ से बाहर हो गए हैं, क्योंकि इनकी रिटायरमेंट इसी वर्ष 31 अगस्त को है। अब मुख्य तौर से पैनल में 1988 बैच के पीके अग्रवाल, 1989 बैच से मोहम्मद अकिल और डाक्टर आरसी मिश्रा के नामों पर ही विचार होगा। तीन दशक की नौकरी पूरी कर चुके अफसरों में 1990 बैच के एडीजीपी शत्रुजीत कपूर, देशराज सिंह और आलोक राय, एसके जैन का नाम पैनल में शामिल होगा। लेकिन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से पैनल के नामों में से छंटनी की बात करें, तो सिर्फ तीन अफसरों का नाम ही सरकार को भेजा जाएगा जिसमें पीके अग्रवाल, मोहम्मद अकील और डा. आरसी. मिश्रा में से ही किसी की लाटरी निकल सकती है।

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