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इस्लाम अपनाने वाली महिला की बढ़ाई गई सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया ये आदेश

महिला ने दावा किया था कि मर्जी से इस्लाम अपनाने के बाद उसे और उसके परिवार को जान का खतरा है और उत्तर प्रदेश पुलिस, माफिया और वीजिलांटी समूहों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने एक जुलाई के आदेश में महिला को पांच जुलाई तक के लिए सुरक्षा प्रदान करते हुए दिल्ली पुलिस को उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने को कहा था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों की लगाई फटकार, कहा- दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ सही तथ्य नहीं किए गए पेश
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दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों की लगाई फटकार

उत्तर प्रदेश की एक महिला की मर्जी से इस्लाम (Islam Converted) अपनाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने एक महिला (Woman) को दी गई अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ाकर 22 जुलाई कर दी है। क्योंकि महिला ने दावा किया था कि मर्जी से इस्लाम अपनाने के बाद उसे और उसके परिवार को जान का खतरा है और उत्तर प्रदेश पुलिस, माफिया और वीजिलांटी समूहों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने एक जुलाई के आदेश में महिला को पांच जुलाई तक के लिए सुरक्षा प्रदान करते हुए दिल्ली पुलिस को उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने को कहा था।

हाईकोर्ट ने महिला के वकील को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता को याचिका की एक प्रति उपलब्ध कराए। कोर्ट ने कहा कि मामले को 22 जुलाई के लिए सूचीबद्ध करें। इस बीच अंतरिम आदेश जारी रहेगा। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने संज्ञान लिया कि उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है और कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष सुनना आवश्यक है। महिला ने इन्हीं के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पहले से नोटिस देने के बावजूद प्रतिवादी संख्या चार और पांच (उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार) की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता (महिला) द्वारा प्रतिवादी संख्या चार और पांच के खिलाफ शिकायत की गई है, लेकिन वे इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उसने कहा कि कोई भी आदेश देने से पहले, उनका पक्ष सुनना उचित है।

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