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SDMC ने की अनोखी पहल! दिल्ली में खुला पहला 'जूता बैंक', बच्चों को भी फ्री मिलेगा खिलौना

बताया जा रहा है कि जरूरतमंदों की मदद करने और स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SMDC) ने बृहस्पतिवार को 'जूता बैंक' खोला। एसएमडीसी ने दावा किया कि यह दिल्ली में इस तरह की पहली पहल है। नगर निकाय ने बताया कि एसएमडीसी के पश्चिम जोन के सुभाष नगर क्षेत्र में जूता बैंक का उद्घाटन किया गया।

SDMC ने की अनौखी पहल! दिल्ली में खुला पहला
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SDMC ने की अनौखी पहल! दिल्ली में खुला पहला 'जूता बैंक'

First Shoe Bank Opened दिल्ली में एक खास तहर की पहल की गई है। जिसके अंर्तगत 'जूता बैंक' (Shoe Bank) खोला गया है। इस जूता बैंक से कई जरूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी। इसके तहत बच्चों के लिए भी फ्री में खिलौना दिए जाएंगे ये जूता बैंक दिल्ली के सुभाष नगर (Subhash Nagar) इलाके में खोला गया है। जिसमें आप अपने पुराने जूते फैंकने की बजाय बैंक में दान दे सकते हैं। जिसके बाद उन जूतों को जरूरतमंद लोगों के पास पहुंचा दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि जरूरतमंदों की मदद करने और स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने बृहस्पतिवार को 'जूता बैंक' खोला। एसएमडीसी ने दावा किया कि यह दिल्ली में इस तरह की पहली पहल है। नगर निकाय ने बताया कि एसएमडीसी के पश्चिम जोन के सुभाष नगर क्षेत्र में जूता बैंक का उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर पश्चिमी जोन के अध्यक्ष कर्नल वी.के. ओबरॉय स्वच्छ भारत अभियान के नोडल अधिकारी राजीव जैन, स्थानीय पार्षद सुरेन्द्र सेतिया, सहायक आयुक्त हरीश कश्यप और निगम के अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त डॉ सोनल स्वरूप ने कहा कि दक्षिण निगम ने एक अनूठी पहल करते हुए आज स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के मद्देनजर पश्चिमी जोन में जरूरतमंद लोगों के लिए पहला जूता बैंक खोला है।

एसएमडीसी ने एक बयान में कहा कि एक खिलौना बैंक और ' प्लास्टिक लाओ-खाद ले जाओ' सुविधाओं के साथ जूता बैंक खोला गया है। एसएमडीसी ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे जरूरतमंदों के लिए पुराने या नए खिलौने, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जूते और जरूरतमंदों के लिए स्कूल बैग दान करें। एसएमडीसी के एक अधिकारी ने कहा कि आम तौर पर लोग पुराने खिलौने, स्कूल बैग और जूते कचरे में फेंक देते हैं। हम उन्हें इसके बजाय इन चीजों को बैंक में दान करने के लिए कह रहे हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों को देने के लिए किया जाएगा।

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