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दिल्ली के लोगों के लिए खुशखबरी, अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल राज्यसभा में पास

आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Puri) ने कहा कि मोदी सरकार (Modi Government) हर किसी को अपना घर मुहैया कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की है।

दिल्ली के लोगों के लिए खुशखबरी, अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल राज्यसभा में पास
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अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने वाला बिल राज्यसभा में पास

राजधानी दिल्ली में अनाधिकृत कॉलोनियों (Unauthorized Colony) को नियमित करने के संबंध में राज्यसभा (Rajya Sabha) ने मंगलवार को एक विधेयक (Bill) को मंजूरी दे दी। इस संबंध में आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Puri) ने कहा कि मोदी सरकार (Modi Government) हर किसी को अपना घर मुहैया कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की है। उन्होंने कह कि इस बिल से पहले अध्यादेश लाए जाने पर कुछ सदस्यों की आपत्तियों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि संसद (Parliament) का शीतकालीन सत्र होता तो इसकी आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद सत्र की प्रतीक्षा करती और अध्यादेश नहीं लाती तो दिल्ली में विभिन्न स्तर पर प्राधिकार संपत्तियों को सील करना शुरू कर देते जिससे दिल्ली के नागरिकों को असुविधा होती। आपको बता दें कि ये कानून बनने के बाद दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र विधि (विशेष उपबंध) दूसरा (संशोधन) अध्यादेश, 2020 का स्थान लेगा। इससे पहले, आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र विधि विशेष उपबंध दूसरा (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया।

इससे संबंधित अध्यादेश पिछले साल 30 दिसंबर को जारी किया गया था और इसके जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधि (विशेष प्रावधान) द्वितीय अधिनियम, 2011 में संशोधन किया गया था। वर्ष 2011 का कानून पिछले साल 31 दिसंबर तक वैध था। अध्यादेश के माध्यम से कानून की समय सीमा 31 दिसंबर, 2023 तक बढ़ा दी गयी थी। वर्ष 2011 के कानून में 31 मार्च, 2002 तक राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव था। इसके अलावा उन कॉलोनियों को भी नियमित करने की बात थी जहां एक जून 2014 तक निर्माण हुआ था। अध्यादेश के जरिए इसमें संशोधन किया ताकि विभिन्न संबंधित कानूनों के तहत अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान की जा सके।

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