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हाइटेक शहर बना सुसाइड कैपिटल! पिछले साल इतने लोगों ने दे दी जान, आंकड़े जानकर उड़ जाएंगे होश

विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2020 में जिले में कुल 380 लोगों ने सुसाइड किया। इनमें से 126 महिलाओं शामिल हैं। जबकि 18 साल से कम उम्र के 24 नाबालिगों और बच्चों ने भी अपनी जान दे दी। वहीं साल 2021 भी आंकड़ों के लिहाज से कुछ सही नहीं जा रहा है। क्योंकि अभी भी नोएडा से रोजाना आत्महत्या की खबर सामने आ ही रही हैं। जो की बेहद चौंकाने वाली स्थिति है।

हाइटेक शहर बना सुसाइड कैपिटल! पिछले साल इतने लोगों ने दे दी जान, आंकड़े जानकर उड़ जाएंगे होश
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हाइटेक शहर बना सुसाइड कैपिटल! पिछले साल इतने लोगों ने दे दी जान

Noida Suicide हाइटेक शहर में लोगों की सुसाइड की खबरों को लेकर एक सर्वे सामने आया है। जिसे देखने के बाद आप भी हिल जाएंगे क्योंकि नोएडा शहर एक आत्महत्या का केंद्र के रूप में उभर रहा है। पिछले साल गौतमबुद्ध नगर में आत्महत्या के बढ़ते मामले आश्चर्यचकित करने वाले है। विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2020 में जिले में कुल 380 लोगों ने सुसाइड किया। इनमें से 126 महिलाओं शामिल है। जबकि 18 साल से कम उम्र के 24 नाबालिगों और बच्चों ने भी अपनी जान दे दी। वहीं साल 2021 भी आंकड़ों के लिहाज से कुछ सही नहीं जा रहा है। क्योंकि अभी भी नोएडा से रोजाना आत्महत्या की खबर सामने आ ही रही है। जो की बेहद चौंकाने वाली स्थिति है।

नोएडा में पिछले साल सबसे ज्यादा 126 महिलाओं ने आत्महत्या की हैं। यह कुल मामलों का एक तिहाई है। इससे एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं ने ही क्यों सुसाइड की। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए। इस वजह से महिलाओं पर घरेलू अत्याचार ज्यादा हुए। उन्हें सेक्सुअल और मानसिक प्रताड़ना का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ा। हालांकि केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय ने महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने भी महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। नोएडा पुलिस में महिला सुरक्षा डीसीपी वृंदा शुक्ला ने इस बारे में कहा कि, महिलाओं की सुरक्षा के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। जिले में आत्महत्या के मामलों में महिलाओं की ज्यादा संख्या बेहद चिंताजनक है। हम इसे रोकने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण पिछले साल भारत समेत पूरी दुनिया की हालत बेहद खराब हो गई थी। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से लोगों की नौकरियां चली गईं। आय का साधन बंद हो गया लोग घरों में कैद हो गए। इसलिए हो सकता है कि आत्महत्या के ज्यादातर मामलों मे आर्थिक तंगी बेहद अहम होती है। इस कारण निराश हो कर लोग अपनी जान दे रहे है। वहीं आत्महत्या के लिए परिवारिक क्लेश भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैकड़ों मामलों में पारिवारिक कलह और निजी जिंदगी में हस्तक्षेप ने लोगों को सुसाइड के लिए मजबूर किया हैं। इसके अलावा टूटे रिश्ते, खराब स्वास्थ्य और डिप्रेशन जैसी वजहों ने भी लोगों ने जान देना शुरू किया है।

साइकोलॉजिस्ट और मानव व्यवहार का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण इंसानों का जीवन कठिन हो गया। अच्छी खासी जिंदगी में परेशानियों का संकट आ गया। जिसके कारण लोगों की चिंता बढ़ती चली गई। लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए। अचानक बदली परिस्थितियों से लोगों के व्यवहार में बदलाव आया। फिर पारिवारिक और सामुदायिक माहौल के मुताबिक लोगों ने आत्महत्या करने के फैसले लेते चले गए।

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