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New Excise Policy 2021: दिल्ली की नई आबकारी नीति पर याचिका में उठाए गए सवाल, हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से मांगा जवाब

New Excise Policy 2021: याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति 2021 को ब्रिटिश काल की जमींदारी व्यवस्था (भू राजस्व के लिये) को फिर से बहाल करने का प्रयास करती है जिसे 26-1-1950 को संविधान लागू होने के बाद समाप्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट की पीठ ने दिल्ली मदिरा व्यापारी संघ (डीएलटीए) की याचिका पर दिल्ली सरकार के साथ ही केन्द्र और दिल्ली के उपराज्यपाल को नोटिस जारी किये।

New Excise Policy 2021: दिल्ली की नई आबकारी नीति पर याचिका में उठाए गए सवाल, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
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दिल्ली की नई आबकारी नीति पर याचिका में उठाए गए सवाल

New Excise Policy 2021 दिल्ली सरकार (Delhi Government) की नई आबकारी नीति पर दायर याचिका (Petition) में सवाल उठाए गए है। जिसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) से जवाब मांगा गया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति 2021 को ब्रिटिश काल की जमींदारी व्यवस्था (Zamindari System) (भू राजस्व के लिये) को फिर से बहाल करने का प्रयास करती है जिसे 26-1-1950 को संविधान लागू होने के बाद समाप्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट की पीठ ने दिल्ली मदिरा व्यापारी संघ (DLTA) की याचिका पर दिल्ली सरकार के साथ ही केन्द्र (Central Government) और दिल्ली के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor of Delhi) को नोटिस जारी किये।

व्यापारियों को शराब के व्यापार का मौलिक अधिकार नहीं

याचिका में कहा गया कि व्यापारियों को शराब के व्यापार का मौलिक अधिकार नहीं है लेकिन उन्हें मौजूदा लाइसेंस जारी रखने से इनकार करने और प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के खिलाफ शिकायत का अधिकार है। याचिका में कहा गया कि कई अन्य कानूनी चुौतियां भी हैं जिनमें जो अति-अमीर नहीं हैं उन्हें वंचित करते हुए एकाधिकार उत्पादन संघ की सुविधा देना शामिल है और इस तरह से प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा रहा है।

पिछली बार याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने किया था इनकार

अदालत ने पिछले महीने याचिका पर नोटिस जारी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कुछ अन्य कंपनियों को प्रतिवादी के तौर पर नामित किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण मोहन ने अदालत को बताया कि पक्षकारों के नाम हटाते हुए संशोधित ज्ञापन दायर किया गया है। अधिवक्ता अरविंद भट्ट और सिद्धार्थ शर्मा के जरिये दायर याचिका में व्यापारी निकाय ने आरोप लगाया कि नई आबकारी नीति असंवैधानिक व अव्यवहारिक है।

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