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फर्जी आधार कार्ड बनाकर कारोबारियों के खातों से करोड़ों की ठगी करने वाले चार गिरफ्तार

नई दिल्ली सेंट्रल जिले के साइबर सेल ने कारोबारियों के खातों में सेंध लगाकर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार बदमाशों को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों के नाम आशुतोष यादव उर्फ राजन, राहुल यादव, राजेश राजभर और अरविंद यादव उर्फ बंधन है।

फर्जी आधार कार्ड बनाकर कारोबारियों के खातों से करोड़ों की ठगी करने वाले चार गिरफ्तार
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ठगी (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली सेंट्रल जिले के साइबर सेल ने कारोबारियों के खातों में सेंध लगाकर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार बदमाशों को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों के नाम आशुतोष यादव उर्फ राजन (32), राहुल यादव (25), राजेश राजभर (38) और अरविंद यादव उर्फ बंधन (29) है। पुलिस की माने तो आरोपी फर्जी आधार कार्ड बनाकर कारोबारियों के खाते से अटैच मोबाइल नंबरों के डुप्लीकेट सिम कार्ड निकलवा लेते थे।

पीड़ितों को जब तब इसका पता चलता। आरोपी तब तक अपना काम कर चुके होते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह गु्रुग्राम में एक कारोबारी के खाते से एक करोड़ 50 लाख और वडोदरा गुजरात से 50 लाख एवं आजमगढ़ से 28 लाख और दिल्ली के आनंद पर्वत से कारोबारी के खाते से 30 लाख रुपये निकाल चुके हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस चार मामले सुलझाने का दावा कर रही है। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।

डीसीपी (सेंट्रल) जसमीत सिंह ने बताया कि आनंद पर्वत इलाके के एक कारोबारी के खाते में सेंध लगाकर ऑनलाइन 30 लाख रुपये की ठगी हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि बदमाशों ने उसके खाते से अटैच नंबर को बंद करवाकर उसके साथ धोखाधड़ी का प्रयास किया। इस दौरान उसे पता चल गया लेकिन दूसरी बार में बदमाश रुपये निकालने में कामयाब हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच का जिम्मा साइबर सेल को सौंपा।

जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने पहली डुप्लीकेट सिम इलाहाबाद से निकलवाई थी। इसके लिए उन्होंने फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। इसके बाद तीन जून 2020 को आरोपियों ने वाराणसी से सिम निकलवाई। आगे जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने दो खातों में रुपये ट्रांसफर किये है। बाद में उन्होंने रुपये वाराणसी और आसपास के इलाकों के एटीएम से निकाल लिये। आगे पुलिस को पता चला कि ट्रांसफर किए खातों में से कुछ खाते ग्रामीण थे।

अखबार में नौकरी देने का विज्ञापन देकर आरोपियों ने उनके खाते खुलवाया और बाद में उन खातों को वह चलाने लगे। पुलिस ने आरोपियों की पहचान की तो वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर और गाजीपुर में उनकी मौजूदगी का पता चला। पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। जांच में पुलिस को पता चला कि गैंग का मुख्य आरोपी पहले से 38 लाख रुपये की ठगी के मामले में जेल में बंद है। इसके बाद पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर दिल्ली लेकर आई।

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