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HC ने दिल्ली सरकार से जताई उम्मीद, कोविड मरीजों के इलाज से उत्पन्न कचरे का निस्तारण CPCB के गाइडलाइन्स के तहत करें

दिल्ली सरकार के कोविड-19 टेस्ट किट और नमूनों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने और ऐसा ना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहने के बाद पीठ ने यह बात कही।

HC ने दिल्ली सरकार से जताई उम्मीद, कोविड मरीजों के इलाज से उत्पन्न कचरे का निस्तारण CPCB के गाइडलाइन्स के तहत करें
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HC ने दिल्ली सरकार से जताई उम्मीद

दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्मीद जतायी है कि कोविड-19 मरीजों के उपचार, जांच और होम आइसोलेशन से उत्पन्न होने वाले कचरे के निस्तारण के लिए दिल्ली सरकार केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों का सतर्कता से पालन करेगी। दिल्ली सरकार के कोविड-19 टेस्ट किट और नमूनों के निस्तारण के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने और ऐसा ना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहने के बाद पीठ ने यह बात कही।

कचरे के निस्तारण को लेकर सीपीसीबी ने जारी किये दिशा-निर्देश

उसने इससे पहले जुलाई में सीपीसीबी द्वारा जारी किए गए कोविड-19 मरीजों के उपचार, जांच और पृथक-वास से उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों के निस्तारण संबंधी दिशा-निर्देशों को भी रिकॉर्ड में लिया। दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील संजय घोष और वकील नमन जैन द्वारा दिए प्रतिवेदन पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) द्वारा दिशा-निर्देशों और मापदंडों का सतर्कतापूर्वक पालन किया जाएगा।

खुलेआम फेंका जा रहा है इस्तेमाल किए गए नमूनें

हाईकोर्ट ने इस अवलोकन के साथ याचिकाकर्ता पंकज मेहता की उस याचिका का निपटारा किया, जिसमें उन्होंने लाजपत नगर में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर रैपिड एंटीजेन परीक्षण में इस्तेमाल किए गए नमूनों के अनुपयुक्त निस्तारण का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि जांच में इस्तेमाल किए गए नमूनों को खुलेआम फेंका जा रहा है और जब उन्होंने बड़े पैमाने पर संक्रमण के खतरे की शिकायत की तब संबंधित डॉक्टर ने कहा कि ये नमूने उन लोगों के हैं, जो संक्रमित नहीं पाए गए हैं।

नगारिक सुरक्षा स्वयंसेवक को लेकर HC ने ये कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तैनात किए गए नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों (सिविल डिफेंस वालंटियर) को दिए अधिकारों का विनियमन करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से सोमवार को कहा कि इसको (याचिका को) एक प्रतिवेदन के तौर पर देखा जाए।

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