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Farmers Protest: राकेश टिकैत बोले- मैंने नहीं कहा कि कृषि कानूनों को लेकर UN जाएंगे, इस दिन संसद में देंगे धरना

Farmers Protest: किसान नेता राकेश टिकैत की यूएन जाने वाली बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिस पर उन्होंने सफाई दी है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मैंने ये नहीं कहा था कि कृषि क़ानूनों को लेकर यूएन (संयुक्त राष्ट्र) जाएंगे। हमने कहा था कि 26 जनवरी के घटना की निष्पक्ष जांच हो जाए।

Farmers Protest: किसान नेता राकेश टिकैत की सरकार को दो टूक- 5 सितंबर को महापंचायत में आर-पार की बनेगी रणनीति
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 किसान नेता राकेश टिकैत की सरकार को दो टूक

Farmers Protest नए कृषि कानूनों (FarmLaws) को लेकर दिल्ली के बॉर्डरों (Delhi Border) पर केंद्र (Central Government) के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों का आंदोलन अब फिर से लाइमलाइट में आने लगा है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार से लेकर कई नेताओं ने इस पर प्रक्रिया दी है। वहीं किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) की यूएन (United Nations) जाने वाली बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिस पर उन्होंने सफाई दी है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मैंने ये नहीं कहा था कि कृषि क़ानूनों को लेकर यूएन (संयुक्त राष्ट्र) जाएंगे। हमने कहा था कि 26 जनवरी के घटना की निष्पक्ष जांच हो जाए।

अगर यहां की एजेंसी जांच नहीं कर रही है तो क्या हम यूएन में जाएं? उन्होंने कहा कि भारत सरकार बातचीत करना चाहती है तो हम तैयार हैं। 22 तारीख से हमारा दिल्ली जाने का कार्यक्रम रहेगा। 22 जुलाई से संसद सत्र शुरू होगा। 22 जुलाई से हमारे 200 लोग संसद के पास धरना देने जाएंगे। इससे पहले, राकेश टिकैत ने कहा था कि राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार का जो ताज़ा प्रस्ताव आया है, वो शर्तों के साथ आया है।

सरकार शर्त के साथ बोल रही है कि कानून वापस नहीं होगा। हमने कोई शर्त नहीं लगाई है, अगर कानून वापसी पर चर्चा होती है तो हम बातचीत शुरू करना चाहते हैं। हम सात महीने से यही बैठे हैं, जो जिस भाषा में आर-पार समझता हो, वही समझे। दिल्ली बॉर्डरों पर हम शांति से बैठे हैं, हमें छेड़ो नहीं और सरकार कह रही है कि यहां से चले जाओ। लेकिन अगर हम जाएंगे तो बातचीत से, नहीं तो लाठी-डंडे-गोली जिससे सरकार भगाना चाहे भगा दे। आपको बता दें कि काले कानूनों के विरोध में दिल्ली के बॉर्डरों पर पिछले 7 महीनों से किसान बैठे है। उनका कहना है कि जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं।

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