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Farmers Protest: राकेश टिकैत ने महापंचायत में लिया हिस्सा, बोले- जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया

Farmers Protest: किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने गाज़ियाबाद के लोनी में किसान महापंचायत में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी होने के बाद भी आदेश दे रहा है कि सिर फूटे बिना कोई नहीं जाना चाहिए। उसका परिवार और वो आरएसएस से जुड़े हैं। जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया, हड्डियां तोड़ी गईं।

Farmers Protest: Farmers Protest: राकेश टिकैत ने महापंचायत में लिया हिस्सा, बोले- जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया, बोले- जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया
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Farmers Protest: राकेश टिकैत ने महापंचायत में लिया हिस्सा, बोले- जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया

Farmers Protest नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर केंद्र (Central Government) के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली के बॉर्डरों (Delhi Border) पर नौ महीनों से प्रदर्शकारी हल्लाबोल कर रहे है। वहीं किसान और सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत होने के बाद भी गतिरोध जारी है। लेकिन केंद्र ने इन कानूनों को रद्द करने से साफ इनकार किया है। इस जवाब में किसानों का कहना है कि जब तक काले कानूनों को रद्द नहीं किया जाता जब तक घर वापसी नहीं होगी। इस बीच, करनाल में हुए किसानों पर लाठीचार्ज मामले में किसानों ने कार्रवाई की मांग की है।

किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने गाज़ियाबाद के लोनी में किसान महापंचायत में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी होने के बाद भी आदेश दे रहा है कि सिर फूटे बिना कोई नहीं जाना चाहिए। उसका परिवार और वो आरएसएस से जुड़े हैं। जानबूझकर किसानों का सिर फोड़ा गया, हड्डियां तोड़ी गईं। इससे पहले, राकेश टिकैत ने करनाल के एसडीएम के विवादित वीडियो सामने आने के बाद पहला सरकारी तालिबानी कहा था।

उन्होंने कहा था कि तुम हमें खालिस्तानी कहोगे तो हम भी तुम्हें तालिबानी कहेंगे। टिकैत ने आगे कहा कि बीजेपी राष्ट्रीय झंडे का सम्मान नहीं करती है। हाल ही में जब किसी का निधन हुआ, तब तिरंगे के ऊपर बीजेपी का झंडा रख दिया गया था। यह राष्ट्रीय ध्वज का अनादर था। उन्हें राष्ट्रीय ध्वज की परवाह नहीं है।

आपको बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा ने घोषणा की है कि आंदोलन को गति और विस्तार देने के लिए 25 सितंबर को भारत बंद किया जाएगा। तीन सत्रों में आयोजित सम्मेलन का दूसरा सत्र श्रमिकों पर थोपे गए4 लेबर कोड पर आधारित रहा। इसे रद्द करने सहित दूसरी समस्याओं पर श्रमिक संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।

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