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Farmers Protest: जंतर-मंतर पर किसानों का पांचवें दिन भी प्रदर्शन, काले कानूनों पर 'किसान संसद' में हुई चर्चा

Farmers Protest: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आज इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से इन कानूनों को लाया, 40 से अधिक किसान संघों के मंच ने कहा कि यह कॉर्पोरेट खेती और संसाधन हथियाने को सुविधाजनक बनाने के लिए एक कानूनी ढांचा है।

Farmers Protest: जंतर-मंतर पर किसानों का पांचवें दिन भी प्रदर्शन, काले कानूनों पर
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जंतर-मंतर पर किसानों का पांचवें दिन भी प्रदर्शन

Farmers Protest नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों का प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के बॉर्डरों (Delhi Border) से आगे बढ़कर जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर पांच दिनों से धरना दे रहे है। वहीं एक तरफ देश की संसद में मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) चल रहा है तो दूसरी तरफ किसानों ने 'किसान संसद' (Kisan Sansad) लगा रखा है। बीते दिन किसानों ने कृषि कानून 2020 पर चर्चा की है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने आज इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से इन कानूनों को लाया, 40 से अधिक किसान संघों के मंच ने कहा कि यह कॉर्पोरेट खेती और संसाधन हथियाने को सुविधाजनक बनाने के लिए एक कानूनी ढांचा है। दिन भर में कुल तीन किसान संसद सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं द्वारा किया गया। वहीं किसान नेता राकेश टिकैत इससे पहले लखनऊ को भी दिल्ली बनाने की चेतानवनी दे चुके है।

चर्चा में कृषि कानूनों के तीनों चरण शामिल थे

चर्चा के प्रमुख विषयों में अनुबंध खेती के कारण खाद्य सुरक्षा को खतरा और पर्यावरणीय क्षरण शामिल थे। एसकेएम ने कहा कि कई सदस्यों ने अनुबंध खेती के अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया जैसे कि किसान द्वारा पूरे सीजन की मेहनत के बाद कोई अन्य कारण बताकर उनके उपज को कंपनियों द्वारा अस्वीकार करने का मामला। एसकेएम ने कहा कि उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे केंद्रीय कानून कॉर्पोरेट खेती और संसाधन-हथियाने को सुविधाजनक बनाता है। पर्यावरणीय नुकसान के अलावा, अनुबंध खेती से खाद्य सुरक्षा के लिए संभावित खतरे पर प्रकाश डाला गया। बयान में कहा गया है कि संविदा कृषि अधिनियम पर बहस अगले दिन भी जारी रहेगी।

दिल्ली विधानसभा में उठेगा किसानों का मुद्दा

दिल्ली सरकार कल से शुरू होने विधानसभा मॉनसून सत्र में किसानों के आंदोलन का मुद्दा उठा सकती है। वहीं, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को शहर में जल आपूर्ति और डीटीसी बसों की हालत पर घेरने की तैयारी कर रही है। सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता ने कहा कि 26 जनवरी को किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से संबंधित मामलों में अदालत में बहस के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त करने के दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव का मामला भी विधानसभा सत्र के दौरान आप के नेता उठा सकते हैं। अरविंद केजरीवाल नीत सरकार ने इसे लेकर उपराज्यपाल की सिफारिश का कड़ा विरोध किया है और विशेष अभियोजकों के लिए दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को हाल में खारिज कर दिया है। उपराज्यपाल ने मामले को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।

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