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Farmers Protest: किसान आंदोलन के 9 महीने पूरे, सिंघू बॉर्डर पर राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए प्रदर्शन को गति और विस्तार देने की तैयारी

किसान नेता राकेश टिकैत ने सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि काफी दुखद है कि नौ महीने हो गए हैं और सरकार बातचीत को अब भी तैयार नहीं है। लेकिन हमें हताश नहीं होना चाहिए। इस सम्मेलन के दौरान हम दिखाएंगे कि नौ महीने में हमने क्या खोया है और क्या पाया है।

Farmers Protest: किसान आंदोलन के 9 महीने पूरे, सिंघू बॉर्डर पर राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए प्रदर्शन को गति और विस्तार देने की तैयारी
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किसान आंदोलन का फाइल फोटो

Farmers Protest दिल्ली के बॉर्डरों (Delhi Border) पर कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर केंद्र (Central Government) के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। अब इस आंदोलन के नौ महीने पूरे हो गए है। जिसे लेकर किसानों आज सिंघू बॉर्डर (Singhu Border) पर राष्ट्रीय सम्मेलन (National Convention) की घोषणा की है। इस कार्यक्रम में किसानों, महिलाओं, युवाओं और मजदूरों के संगठनों के 1,500 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके जरिए ही कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को गति और विस्तार प्रदान करना है।

भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि काफी दुखद है कि नौ महीने हो गए हैं और सरकार बातचीत को अब भी तैयार नहीं है। लेकिन हमें हताश नहीं होना चाहिए। इस सम्मेलन के दौरान हम दिखाएंगे कि नौ महीने में हमने क्या खोया है और क्या पाया है। उधर, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मिलों द्वारा गन्ना किसानों को दिए जाने वाले न्यूनतम मूल्य में वृद्धि को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर अपर्याप्त बताया। मिलों को, गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल पांच रुपये अधिक देना होगा।

केंद्र सरकार ने बुधवार को 2021-22 के नये विपणन सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी (एफआरपी) मूल्य पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंहालांकि, इसके साथ ही सरकार ने चीनी के बिक्री मूल्य में तत्काल बढ़ोतरी से इनकार किया है। टल कर दिया है। आपको बता दें कि किसान पिछले साल नंवबर से दिल्ली बॉर्डरों पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बार-बार कानूनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को खत्म करने और उन्हें बड़े कॉर्पोरेट की दया का मोहताज बनाने का भय व्यक्त किया है। सरकार और किसानों के बीच इस संबंध में 11 दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गतिरोध अब भी कायम है।

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