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Fake Call Center: शाहीन बाग इलाके में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को ठगने के आरोप में चार लोग गिरफ्तार

Fake Call Center: ये अमेरिकन को अमेजन का अधिकारी बताकर ठगी करते थे। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद मुकर्रम हुसैन (29), अर्जुन सिंह सैनी (32), गगन भाटिया (30) और शादाब अहमद (25) के रूप में हुई हैं। इनके पास से दस मोबाइल फोन, एक वाईफाई राउटर, चार लैपटॉप और दो डेस्कटॉप कम्प्यूटर बरामद किए गए हैं।

Fake Call Center: शाहीन बाग इलाके में फर्जी कॉल सेंटर भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को ठगने के आरोप में चार लोग गिरफ्तार
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शाहीन बाग इलाके में फर्जी कॉल सेंटर भंडाफोड़

Fake Call Center दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ (Busted) किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कई फेक कॉल सेंटर का खुलासा किया है। जो विदेशियों के साथ ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। इस क्रम में बीते दिन शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया गया है। ये अमेरिकन को अमेजन का अधिकारी बताकर ठगी करते थे। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार (Four People Arrested) किया है। इनकी पहचान मोहम्मद मुकर्रम हुसैन (29), अर्जुन सिंह सैनी (32), गगन भाटिया (30) और शादाब अहमद (25) के रूप में हुई हैं। इनके पास से दस मोबाइल फोन, एक वाईफाई राउटर, चार लैपटॉप और दो डेस्कटॉप कम्प्यूटर बरामद किए गए हैं।

मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है

पुलिस ने बताया कि अपने साथियों की मदद से इन लोगों ने 'वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल' (वीओआईपी) का इस्तेमाल करके फोन किए। अन्य लोगों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। छह अक्टूबर और सात अक्टूबर की मध्यरात्रि को पुलिस को शाहीन बाग में फर्जी कॉल सेंटर के बारे में सूचना मिली थी। पुलिस उपायुक्त (दक्षिणपूर्व) ईशा पांडेय ने बताया कि सुबह करीब साढ़े चार बजे टीम ने ठिकाने पर छापा मारा जहां उन्होंने चार लोगों को विदेशियों के साथ टेलीफोन पर बात करते हुए पाया। उनकी स्क्रीन पर अंतरराष्ट्रीय नंबर दिख रहे थे। पुलिस दल को देखने पर उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर चारों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोपियों ने तकनीकी साधनों का किया इस्तेमाल

उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपियों ने तकनीकी साधनों के जरिए ऐसी व्यवस्था की थी कि इंटरनेट पर कोई भी सर्च किए जाने पर उनकी फर्जी वेबसाइट का टोल फ्री नंबर सबसे ऊपर दिखायी देता था। सर्च करते हुए पीड़ित मुख्यत: अमेरिकी नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने या तकनीकी सहयोग पाने के लिए उनसे संपर्क करते थे। उन्होंने बताया कि सेवाओं की पेशकश करने के लिए वे अमेजन गिफ्ट कार्ड के जरिए पीड़ितों से पैसे लेते और इसके बाद एक ट्रेडिंग मंच के जरिए इन पैसों को हासिल करते थे।

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