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Delhi Zoo: दिल्ली चिड़ियाघर में नवरात्रि के अवसर पर एक शेर और दो शेरनियों का नामकरण, दिए गए माता के ये नाम

Delhi Zoo: पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दो शेरनियों और एक शेर का नामकरण किया गया। उनको माता रानी का नाम महा गौरी, शैलजा और महेश्वर के नाम पर रखा गया। इन्हें हाल में गुजरात से दिल्ली के चिड़ियाघर लाया गया है

Delhi Zoo: दिल्ली चिड़ियाघर में नवरात्रि के अवसर पर एक शेर और दो शेरनियों का नामकरण, दिए गए ये नाम, पढ़ें पूरी खबर
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दिल्ली चिड़ियाघर में नवरात्रि के अवसर पर एक शेर और दो शेरनियों का नामकरण

Delhi Zoo: दिल्ली समेत देशभर में नवरात्रि त्योहार (Navratri 2021) मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि का तीसरा दिन है और इस दिन मां के 'चंद्रघंटा' स्वरूप की उपासना की जाती है। इनके सिर पर घंटे के आकार का चन्द्रमा है। इसलिए इनको चंद्रघंटा (Chandraghanta) कहा जाता है। वहीं, इस बीच दिल्ली के चिड़ियाघर (Zoo In Delhi) से नवरात्रि के अवसर पर एक अच्छी खबर सामने आई है। यहां एक शेर और दो शेरनियों (Maming Of Two Lionesses And Lion) के नाम माता रानी के नाम पर रखे गए है। इस बात की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे (Union Minister of State for Environment Ashwini Kumar Choubey) ने शनिवार को दी है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर दो शेरनियों और एक शेर का नामकरण किया गया। उनको माता रानी का नाम महा गौरी, शैलजा और महेश्वर (Maha Gauri, Shailja and Maheshwar) के नाम पर रखा गया। इन्हें हाल में गुजरात (Gujarat) से दिल्ली के चिड़ियाघर लाया गया है।

दिल्ली के चिड़ियाघर को पिछले महीने गुजरात के सक्करबाग से पशु आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत प्रजनन उद्देश्य के लिए शेर और शेरनी मिले हैं। चिड़ियाघर में वन्यजीव सप्ताह के समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री शामिल हुए और उन्होंने शेर और शेरनी के बाड़े के पास ऐसे पेड़ लगाए जो गुजरात में पाये जाते हैं। एक बयान में कहा गया कि यह नवरात्रि का अवसर है इसलिए चौबे ने इन शेरों के नाम महा गौरी, शैलजा तथा महेश्वर रखा।

मंत्री ने महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र से लाई गई दो बाघिन का नाम अदिति और सिद्धि रखा। बाघिनों को चंद्रपुर के भ्रामापुरी वन प्रभाग से बचाया गया था। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के अनुसार, संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में वैसी प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है, जिनकी संख्या उनके निवास क्षेत्रों में औद्योगीकरण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हो रही है या निकट भविष्य में कम हो सकती है।

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