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Delhi Pollution: यमुना में प्रदूषण फैलाने पर बड़ी कार्रवाई- DPCC ने 12 CETP पर इतने करोड़ का लगाया जुर्माना

Delhi Pollution: डीपीसीसी ने गंदे जल के निपटान के मानकों का लगातार पालन न करने के लिए 12 कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट' (सीईटीपी) पर 12 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। शहर में 24 औद्योगिक इलाके हैं जिनमें से 17 इलाके 12 सीईटीपीएस से जुड़े हैं जो औद्योगिक ईकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को पुन: इस्तेमाल करने या उसे यमुना में बहाने से पहले उसका शोधन करते हैं।

Delhi Pollution: यमुना प्रदूषण फैलाने पर बड़ी कार्रवाई- DPCC ने 12 CETP पर इतने करोड़ का लगाया जुर्माना
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यमुना प्रदूषण फैलाने पर बड़ी कार्रवाई

Delhi Yamuna Pollution दिल्ली में लॉकडाउन में ढील मिलने के साथ ही कई प्लांटों और फैक्ट्रियों (Plant And Factories) को दोबारा से खोला गया है। वहीं ये प्लांट नियमों का पालन नहीं कर रहे है। जिसकी वजह से दिल्ली की यमुना नदी प्रदूषित हो रही है। इसके मद्देनजर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने इन प्लांटों और फैक्ट्रियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। डीपीसीसी ने गंदे जल के निपटान के मानकों का लगातार पालन न करने के लिए 12 कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट' (CETP) पर 12 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। शहर में 24 औद्योगिक इलाके हैं जिनमें से 17 इलाके 12 सीईटीपीएस से जुड़े हैं जो औद्योगिक ईकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को पुन: इस्तेमाल करने या उसे यमुना में बहाने से पहले उसका शोधन करते हैं।

ये है यमुना नदी में प्रदूषण की मुख्य वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना शोधन वाला अपशिष्ट जल और सीईटीपी से निकलने वाले गंदे पानी की खराब गुणवत्ता तथा सीवेज जल शोधन संयंत्र दिल्ली में यमुना नदी में प्रदूषण की मुख्य वजह है। ये 12 सीईटीपी झिलमिल, बादली, मायापुरी, मंगोलपुरी, नांगलोई, ओखला, नरेला, बवाना, नारायणा, जीटीके रोड, केशव पुरम में औद्योगिक इलाकों में हैं। डीपीसीसी ने इन सीईटीपी को कई नोटिस जारी कर उनसे अपशिष्ट जल के निपटान के मानकों पर खरा उतरने के लिए सुधारात्मक उपाय उठाने के लिए कहा था। डीपीसीसी के अनुसार, ये सीईटीपी फरवरी 2019 से इस साल फरवरी के बीच बार-बार मानकों पर खरा उतरने में नाकाम रहीं।

नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड प्रदूषण एक साल में 125 प्रतिशत तक बढ़ा

दिल्ली में एक साल के दौरान एनओ-2 यानी नाइट्रोजन-डाई-ऑक्साइड के प्रदूषण स्तर में 125 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह दावा एक अध्ययन में किया है। अध्ययन के दौरान दिल्ली सहित देश की आठ, सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों की राजधानियों में एनओ-2 के स्तर का विश्लेषण किया। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, सभी आठ राजधानियों- चेन्नई, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर और लखनऊ- में एनओ-2 प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखने को मिली लेकिन दिल्ली की आबोहवा में इस अवधि के दौरान नाटकीय स्तर पर इस प्रदूषक में वृद्धि देखने को मिली। एनओ-2 खतरनाक प्रदूषक है जो वाहनों, जनरेटरों और औद्योगिक प्रक्रिया के दौरान ईंधन जलने से वातावरण में पहुंचता है। इसके संपर्क में आने से सभी उम्र के लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है और उनमें श्वांस एवं रक्तसंचार प्रणाली में विकार आने की आशंका बढ़ती है।

डीपीसीसी ने जींस की रंगाई और धुलाई करने वाली छह इकाइयों को सील किया

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कपड़ों की रंगाई और धुलाई करने वाली छह इकाइयों को सील कर दिया। इन इकाइयों से कवि नगर इलाके का पानी दूषित हो रहा था और स्थानीय लोग तथा क्षेत्र के प्रतिनिधि इसका विरोध कर रहे थे। डीपीसीसी, राजस्व विभाग और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने पिछले साल दिसंबर में कपड़ें धुलाई वाली 40 इकाइयों को सील कर दिया था। लॉकडाउन के प्रतिबंध हटने के बाद समिति को ख्याला और आसपास के क्षेत्रों में ऐसी इकाइयों के फिर से खुलने शिकायतें मिलने लगी थीं।

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