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Delhi Riots: गलत बयानों पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की फिर लगाई फटकार, कहा- शपथ लेकर...

Delhi Riots: एक हेड कांस्टेबल ने अपनी गवाही में जज से कहा कि उन्होंने दंगाइयों - विकास कश्यप, गोलू कश्यप और रिंकू सब्जीवाला की पहचान की थी। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों में से एक है। उन्होंने कहा कि मैं साल 2019 से संबंधित क्षेत्र का बीट अधिकारी था। मैं सभी चार आरोपियों और विकास कश्यप, गोलू कश्यप तथा रिंकू सब्जीवाला को घटना के पहले से ही नाम और हुलिया से जानता था।

Delhi Riots: गलत बयानों पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की फिर लगाई फटकार, कहा- शपथ लेकर...
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 गलत बयानों पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की फिर लगाई फटकार

Delhi Riots दिल्ली में पिछले साल फरवरी माह में हुए सांप्रदायिक दंगों (Communal Riots) से जुड़े एक मामलों की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने एक बार फिर से पुलिस (Delhi Police) की फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि पुलिस गवाहों में से एक शपथ लेकर गलत बयान दे रहा है। इससे पहले एक पुलिसकर्मी ने तीन कथित दंगाइयों की पहचान की लेकिन एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी। इस पर जज ने कहा कि यह बहुत ही अफसोसजनक स्थिति है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने दी जानकारी

एक हेड कांस्टेबल ने अपनी गवाही में जज से कहा कि उन्होंने दंगाइयों - विकास कश्यप, गोलू कश्यप और रिंकू सब्जीवाला की पहचान की थी। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों में से एक है। उन्होंने कहा कि मैं साल 2019 से संबंधित क्षेत्र का बीट अधिकारी था। मैं सभी चार आरोपियों और विकास कश्यप, गोलू कश्यप तथा रिंकू सब्जीवाला को घटना के पहले से ही नाम और हुलिया से जानता था। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मी ने दंगों के समय मौके पर उनकी उपस्थिति के बारे में स्पष्ट रूप से जोर दिया तथा उन्हें उनके नाम के साथ ही उनके पेशे से भी पहचाना।

तीन आरोपियों की पहचान की गई

इसके विपरीत, अभियोजन की ओर से एक अन्य गवाह- एक सहायक उपनिरीक्षक ने कहा कि उन तीन आरोपियों की जांच के दौरान पहचान नहीं हो सकी जिनके नाम हेड कांस्टेबल ने लिए थे। उन्होंने अदालत से कहा कि मैंने शेष तीन आरोपियों की तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चल सका। इस बीच, मामले के जांच अधिकारी (आईओ) ने कहा कि इस बात की पुष्टि करने के लिए रिकॉर्ड में कोई दस्तावेज नहीं है कि तीनों आरोपियों के नाम रिकॉर्ड में होने के बावजूद उनकी कभी जांच की गई थी।

दंगों में 53 लोगों की मौत हो गयी थी

इस पर अदालत ने कहा कि इसके विपरीत, कहा गया है कि जांच के दौरान इन आरोपियों की पहचान स्थापित नहीं हो सकी। रिकार्ड में ऐसी कोई सामग्री नहीं है कि उक्त आरोपियों को पकड़ने के लिए जांच अधिकारी द्वारा कभी प्रयास किए गए थे। प्रथम दृष्टया, पुलिस गवाहों में से एक शपथ लेने के बाद भी झूठ बोल रहा है जो भादंसं की धारा 193 के तहत दंडनीय है। आपको बता दें कि दंगों में 53 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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