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Delhi Pollution: दिल्ली सरकार का फैसला, 24 सितंबर से तैयार करेगी बायो-डीकंपोजर, गोपाल राय ने केंद्र पर लगाया आरोप

Delhi Pollution: राय ने यह भी कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राजधानी के आसपास के राज्यों में पूसा बायो-डीकंपोजर के उपयोग और प्रदूषण से संबंधित अन्य मुद्दों पर मुलाकात के लिए उन्हें अब तक समय नहीं दिया है। राय ने कहा कि हम 24 सितंबर से पूसा बायो डीकंपोजर तैयार करना शुरू करेंगे और यह पांच अक्टूबर तक तैयार हो जाएगा।

Delhi Pollution: दिल्ली सरकार का फैसला, 24 सितंबर से बायो-डीकंपोजर का खेतों में करेगी छिड़काव, केंद्र पर लगाया आरोप
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दिल्ली सरकार का फैसला, 24 सितंबर से बायो-डीकंपोजर का खेतों में करेगी छिड़काव

Delhi Pollution दिल्ली में प्रदूषण पर काबू करने के लिए केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) कदम उठा रही है। इस बीच, दिल्ली सरकार 24 सितंबर से पूसा बायो-डीकंपोजर (Bio Decomposer) तैयार करना शुरू करेगी और यह पांच अक्टूबर तक धान के खेतों में इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा। इस बारे में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय (Delhi Environment Minister Gopal Rai) ने आज जानकारी दी है। बता दें कि बायो-डीकंपोजर एक घोल है जो पराली को खाद बना सकता है। इससे खेतों की उर्वरक शक्ति भी बढ़ जाती है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री मिलने का नहीं दिया समय

राय ने यह भी कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राजधानी के आसपास के राज्यों में पूसा बायो-डीकंपोजर के उपयोग और प्रदूषण से संबंधित अन्य मुद्दों पर मुलाकात के लिए उन्हें अब तक समय नहीं दिया है। राय ने कहा कि हम 24 सितंबर से पूसा बायो डीकंपोजर तैयार करना शुरू करेंगे और यह पांच अक्टूबर तक तैयार हो जाएगा। हमने इस साल प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है ताकि किसानों को अगली फसल के लिए अपने खेतों को तैयार करने के वास्ते अधिक समय मिल सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खड़खड़ी नहर में तैयारियां शुरू करेंगे।

25 सदस्यीय टीम का किया गठन

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) और कृषि विभाग के वैज्ञानिकों की एक टीम इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी। राय के मुताबिक, पिछले साल के विपरीत, इस बार घोल का उपयोग बासमती चावल के खेतों में भी फसल के ठूंठ को खाद में तब्दील करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने हमें बताया कि धान की फसल काटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टर से बड़ी मात्रा में ठूंठ रह जाता है। इसलिए इस बार जहां भी जरूरत होगी घोल का छिड़काव किया जाएगा। इस घोल का इस्तेमाल कम से कम 4,000 एकड़ में किया जाएगा, जिस पर सरकार को 50 लाख रुपये खर्च आएगा। मंत्री ने कहा कि हमने उन किसानों का पंजीकरण करने के लिए 25 सदस्यीय टीम का गठन किया है जो अपने खेतों में घोल का छिड़काव करना चाहते हैं।

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