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Delhi Pollution: दिल्ली में एंटी डस्ट अभियान आज से शुरू, नियमों का उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं, DPCC ने जारी किए आदेश

Delhi Pollution: नियमों का पालन नहीं करने पर एनजीटी (NGT) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। निगरानी के लिए 31 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की 17 व ग्रीन मार्शल की 14 टीमें तैनात रहेंगी। वहीं दूसरी तरफ डीपीसीसी के अनुसार दिल्ली में निर्माण साइट पर धूल नियंत्रण दिशानिर्देशों के अनुपालन में सुधार हुआ है और यह पिछले साल नवंबर-दिसंबर के 63 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-अगस्त में 90 प्रतिशत हो गया है।

Delhi Pollution: दिल्ली में एंटी डस्ट अभियान आज से शुरू, नियमों का उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं,  DPCC ने जारी किए आदेश
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दिल्ली में एंटी डस्ट अभियान आज से शुरू, नियमों का उल्लंघन करने वालों की खैर नहीं

Delhi Pollution दिल्ली में आज से प्रदूषण से निपटने के लिए एंटी डस्ट अभियान (Anti Dust Campaign) की शुरुआत की गई। इसके तहत निर्माण साइट (Construction Site) पर निर्माण संबंधी नियमों को लागू करना जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर एनजीटी (NGT) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। निगरानी के लिए 31 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की 17 व ग्रीन मार्शल की 14 टीमें तैनात रहेंगी। वहीं दूसरी तरफ डीपीसीसी के अनुसार दिल्ली में निर्माण साइट पर धूल नियंत्रण दिशानिर्देशों के अनुपालन में सुधार हुआ है और यह पिछले साल नवंबर-दिसंबर के 63 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-अगस्त में 90 प्रतिशत हो गया है। आंकड़ों के अनुसार डीपीसीसी के दलों ने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में 11,489 स्थलों का निरीक्षण किया था। इनमें से 7,288 (63 प्रतिशत) धूल नियंत्रित करने के उपायों का पालन करते पाये गये। इसी तरह इस साल जुलाई-अगस्त में 5,619 स्थलों का निरीक्षण किया गया और इनमें से 5,049 (90 प्रतिशत) ने नियमों का पालन किया।

1-15 नवंबर के बीच सबसे अधिक रहता है वायु प्रदूषण: डीपीसीसी

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा पिछले पांच वर्षों में एकत्रित किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में लोग हर साल एक से 15 नवंबर के बीच सबसे खराब हवा में सांस लेते हैं। पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि 15 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच प्रदूषण में व्यापक वृद्धि दर्ज की जाती है। पीएम2.5 का औसत स्तर 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 285 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि इस दौरान वे सभी गतिविधियां काफी सक्रिय होती हैं, जिनसे प्रदूषण अधिक फैलता है। इस समय में पराली भी सबसे अधिक जलायी जाती है।

पटाखा निर्माता प्रतिबंधित पदार्थ हरित पटाखों के रूप में इस्तेमाल कर रहे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरित पटाखों की आड़ में पटाखा निर्माताओं द्वारा प्रतिबंधित पदार्थे का इस्तेमाल किया जा रहा है और दोहराया कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के उसके पहले के आदेश का पालन हर राज्य को करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि त्योहार मनाने के खिलाफ नहीं है लेकिन दूसरे नागरिकों के जीवन की कीमत पर नहीं। पीठ ने कहा कि जश्न का मतलब तेज पटाखों का इस्तेमाल नहीं है, यह फुलझड़ी के साथ भी हो सकता है और शोर न मचाने वाले पटाखों के साथ भी। इसने कहा कि हमारे पिछले आदेश का हर राज्य द्वारा पालन किया जाना चाहिए। इस तथ्य के बावजूद कि संयुक्त पटाखों पर एक विशिष्ट प्रतिबंध है, यदि आप किसी राज्य या शहर या किसी उत्सव में जाते हैं, तो संयुक्त पटाखे बाजार में खुले तौर पर उपलब्ध हैं।

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