Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

दिल्ली हाईकोर्ट ने किया साफ- डकैती, लूट समेत इन मामलों में नहीं मिलेगी अंतरिम जमानत

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली समिति ने यह स्पष्टीकरण दिया क्योंकि हाईकोर्ट के जजों में से एक जज ने फिरौती, जानबूझकर चोट पहुंचाना और डकैती या लूट के तहत मुकदमे का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत के लिए याचिका पर विचार कर रही पीठों के मार्गदर्शन के लिए इस मुद्दे को समिति के समक्ष रखने का आग्रह किया था ताकि परस्पर विरोधी आदेशों से बचा जा सके।

दिल्ली हाईकोर्ट ने किया साफ- डकैती, लूट समेत इन मामलों में नहीं मिलेगी अंतरिम जमानत
X

दिल्ली हाईकोर्ट ने किया साफ

Delhi High Court दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया है कि डकैती, लूट और फिरौती (Robbery, Robbery and Ransom) के लिए अपहरण जैसे क्राइम (Crime) मामलों में कैदियों (Prisoners) को अंतरिम जमानत (Interim Bail) नहीं मिलेगी। कोरोना महामारी (Corona Pandemic) में जेलों में कैदियों की भीड़ कम करने के लिए एक टीम का गठन किया गया था। जिसने यह निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली समिति ने यह स्पष्टीकरण दिया क्योंकि हाईकोर्ट के जजों में से एक जज ने फिरौती, जानबूझकर चोट पहुंचाना और डकैती या लूट के तहत मुकदमे का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत के लिए याचिका पर विचार कर रही पीठों के मार्गदर्शन के लिए इस मुद्दे को समिति के समक्ष रखने का आग्रह किया था ताकि परस्पर विरोधी आदेशों से बचा जा सके।

हत्या के तहत अपराध में भी सोच समझकर जमानत देने का आग्रह

समिति ने आठ सितंबर को हुई बैठक के कार्य विवरणों में कहा कि केवल इसलिए कि निर्दिष्ट अपराध- जैसे हत्या के तहत अपराध, वह भी शर्त के साथ, अंतरिम जमानत देने के लिए अनुशंसित मामलों की श्रेणी में शामिल है, इसका मतलब यह नहीं है कि डकैती, लूट, फिरौती के लिए अपहरण जैसे अपराध आदि भी शामिल हैं। ऐसे मामलों को जानबूझकर बाहर रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का किया जा रहा पालन

एचपीसी ने कहा कि आयोजित विचार-विमर्श के मद्देनजर, यह सर्वसम्मति से स्पष्ट किया जाता है कि डकैती, लूट फिरौती के लिए अपहरण आदि जैसे अपराध इस समिति द्वारा चार मई, और 11 मई, 2021 की बैठकों में निर्धारित मानदंडों में शामिल नहीं हैं। जेलों में भीड़ कम करने और वहां कोविड-19 के प्रसार को रोकने के सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के निर्देश के मद्देनजर इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया था।


Heading

Content Area


Next Story