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बिहार आश्रय गृह मामला में दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगा, ब्रजेश ठाकुर ने की अपील

निचली अदालत ने 20 जनवरी को अपने फैसले में ठाकुर को इस मामले में दोषी ठहराया था और 11 फरवरी को उसे इस अपराध के लिये मौत हो जाने तक जेल में ही रहने सजा सुनाई गयी थी। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।

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दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक आश्रय गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न के जुर्म में दोषी ठहराये गये ब्रजेश ठाकुर की अपील पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने सीबीआई से ठाकुर की उस याचिका पर भी जवाब मांगा है जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा उसपर लगाए गए 32.20 लाख रुपये के जुर्माने पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। यह याचिका अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे के माध्यम से दायर की गई है।

निचली कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर को मृत्यु होने तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। सीबीआई को 25 अगस्त से पहले इस नोटिस का जवाब देना है। निचली अदालत ने 20 जनवरी को अपने फैसले में ठाकुर को इस मामले में दोषी ठहराया था और 11 फरवरी को उसे इस अपराध के लिये मौत हो जाने तक जेल में ही रहने सजा सुनाई गयी थी। पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अपील स्वीकार की जाती है। सीबीआई अगली तारीख से पहले स्थिति रिपोर्ट या जवाब दायर करे। हाईकोर्ट ने इस अपील को पहले से लंबित बाल कल्याण समिति के तत्कालीन प्रमुख एवं सह-दोषी दिलिप वर्मा की अपील के साथ सूचीबद्ध कर दिया। निचली अदालत ने मामले में वर्मा को भी ताउम्र कैद में रहने की सजा सुनाई है।

बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपी) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके ठाकुर के अलावा, निचली अदालत ने मामले में कई अन्य लोगों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ठाकुर ने अपनी अपील में तर्क दिया है कि साकेत के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) द्वारा मुकदमा जल्दबाजी में पूरा किया गया जो कि संविधान के तहत प्रदत्त मुक्त एवं निष्पक्ष मुकदमे के उसके अधिकार का हनन है। उसने दावा किया कि उसके आवेदनों एवं दलीलों को उचित ढंग से न्यायिक विवेक का प्रयोग किए बिना मशीनी तरीके से खारिज किया गया और इस तरह से किया गया कि मुकदमा किसी तरह पूरा हो जाए।

वकील निशांक मट्टू, अनुराग आंदले और श्रीद कृष्णा के जरिए दायर अपील में दावा किया गया कि दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने का आदेश निचली अदालत ने पक्षपातपूर्ण एवं मशीनी तरीके से सुनाया गया जो ठाकुर के खिलाफ लगे आरोपों की वीभत्सता और लोगों की अवधारणा से प्रभावित था। अपील में यह मुद्दा भी उठाया गया कि बलात्कार से संबंधित मामले में आरोपी की क्षमता की जांच एक मूल तथ्य है जिसे अभियोजन पक्ष को साबित करना होता है। अपील में कहा गया है कि बिहार पुलिस और सीबीआई ने ब्रजेश ठाकुर की इस क्षमता जांच नहीं कराई।

दिव्यांग को हमेशा से कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखा गया: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि दिव्यांग लोगों को हमेशा से कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखा गया है और इसमें कोई बहस नहीं कि उन्हें हाशिये पर रखा गया। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि इस तथ्य पर किसी बहस की गुंजाइश नहीं कि दिव्यांग व्यक्ति हर योजना में हाशिये पर पहुंच जाते हैं। अगर केंद्र को इस बात की जानकारी नहीं है तो हम उसे इस बारे में जागरुक करेंगे।

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