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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- पेशे के आधार पर नहीं, बल्कि कोरोना महामारी का खतरा देखकर हो रहा टीकाकरण

हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्यायाधीश, अधिवक्ताओं और अदालत के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाने की मांग की थी। इस पत्र को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकारते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने नए प्रोटोकॉल से जताई नाराजगी, कहा- ऐसा लगता है केंद्र लोगों को मरने देना चाहती है
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दिल्ली हाईकोर्ट 

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) में कोरोना टीके (Corona Vaccination) से संबधित एक याचिका पर केंद्र सरकार (Central Government) ने जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) पेशे के आधार पर नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी की चपेट में आने की संभावना के आधार पर चुने गए अलग-अलग उम्र व श्रेणी के लोगों को लगाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्यायाधीश, अधिवक्ताओं और अदालत के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाने की मांग की थी। इस पत्र को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकारते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।

न्यायपालिका लोकतंत्र का एक स्तंभ है: हाईकोर्ट

इससे पहले हुई सनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सालिस्टिर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विपिन सांघी की पीठ को बताया कि टीकाकरण को पेशे के हिसाब से नहीं, बल्कि विशेषज्ञों ने जो उम्र और संक्रमण के जोखिम की अलग-अलग श्रेणियां बांटी हैं, उसके मुताबिक टीकाकरण किया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक स्तंभ है और इसकी तुलना अन्य किसी पेशे के साथ नहीं की जा सकती।

कुल मामलों में 85 प्रतिशत से अधिक मामले छह राज्यों से

महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु से लगातार कोविड-19 के ज्यादा मामले आ रहे हैं और पिछले 24 घंटे में देश में सामने आए कुल मामलों में इन छह राज्यों की हिस्सेदारी 85.91 प्रतिशत रही। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को इस बारे में बताया। पिछले 24 घंटे में देश में कोविड-19 के 22,854 मामले आये। मंत्रालय के अनुसार नये मामलों में सबसे अधिक 13,659 मामले (देश में कुल मामलों का करीब 60 प्रतिशत) महाराष्ट्र से है।

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