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दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को याद दिलाया वादा, कहा- दो हफ्ते में नहीं किया पूरा तो अवमानना का लगाया जाएगा आरोप

वहीं इसके जवाब में दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट से कहा कि मामले पर गौर किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये दो सप्ताह का समय मांगा। याचिका में कहा गया है कि जब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक किराए के भुगतान पर स्पष्ट नीति नहीं बनाई जा सकती। याचिका के अनुसार, सरकार ने जानबूझकर अदालत के आदेश का पालन न करके अवमानना भी की है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को याद दिलाया वादा, कहा- दो हफ्ते में नहीं किया पूरा तो अवमानना का लगाया जाएगा आरोप
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को याद दिलाया वादा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) को वह वादा याद दिलाया है। जिसमें कहा गया था कि कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के समय अगर किरायदार किराया (Rent) देने में असमर्थ है तो दिल्ली सरकार उसका भुगतान करेगी। इस संबंध में याचिका (Petition) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दो सप्ताह का समय दिया। वहीं इसके जवाब में दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट से कहा कि मामले पर गौर किया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये दो सप्ताह का समय मांगा।

याचिका में कहा गया है कि जब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक किराए के भुगतान पर स्पष्ट नीति नहीं बनाई जा सकती। याचिका के अनुसार, सरकार ने जानबूझकर अदालत के आदेश का पालन न करके अवमानना भी की है। हाईकोर्ट ने 89 पृष्ठों के निर्णय में कहा था कि महामारी और प्रवासी मजदूरों के बड़े पैमाने पर पलायन के कारण घोषित तालाबंदी की पृष्ठभूमि में जानबूझकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए एक बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकार को उचित शासन के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन पर निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, उसपर नाकामी जाहिर नहीं की जा सकती। मामले पर अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस मामले पर छह सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार आदेश पर अमल नहीं कर पाई। इसके बाद इस संबंध में सरकार पर जानबूझकर अदालत की अवमानना का आरोप लगाते हुए एक याचिका दाखिल की गई, जिसपर न्यायमूर्ति पल्ली सुनवाई कर रही थीं। अदालत ने 22 जून को फैसला सुनाया था कि मुख्यमंत्री के इस वादे पर अमल किया जाना चाहिये।

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