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दिल्ली की बड़ी मार्केट के बाद गुरुद्वारों पर DDMA की नजर, SDM ने कोरोना गाइडलाइंस को लेकर दी ये चेतावनी

एसडीएम ने गुरुद्वारों के अधिकारियों को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। जिसमें किसी भी धार्मिक स्थल में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक है। डीडीएमए द्वारा 10 जुलाई को जारी ताजा आदेशों के मुताबिक, धार्मिक स्थलों को खुले रहने की अनुमति रहेगी लेकिन श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दिल्ली की बड़ी मार्केट के बाद गुरुद्वारों पर DDMA की नजर, SDM ने कोरोना गाइडलाइंस को लेकर दी ये चेतावनी
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दिल्ली की बड़ी मार्केट के बाद गुरुद्वारों पर DDMA की नजर

दिल्ली की बड़ी मार्केटों (Delhi Market) में कोरोना नियमों (Covid Guidelines) के उल्लंघन किया गया। जिसके बाद वहां कार्रवाई भी की गई। वहीं अब गुरुद्वारों (Gurudwara) से भी कोविड गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाने की खबरे सामने आ रही है। इस बीच, दिल्ली में वसंत विहार (Vasant Vihar) के एसडीएम ने गुरुद्वारों के अधिकारियों को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। जिसमें किसी भी धार्मिक स्थल में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक है। डीडीएमए द्वारा 10 जुलाई को जारी ताजा आदेशों के मुताबिक, धार्मिक स्थलों को खुले रहने की अनुमति रहेगी लेकिन श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन होने पर की जाएगी सख्त कार्रवाई

एसडीएम द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया कि किसी भी उल्लंघन की दशा में संबंधित गुरुद्वारे के अधिकारियों के साथ ही व्यक्ति के खिलाफ सख्त दंडात्मक अथवा आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। संबंधित गुरुद्वारे के सभी अध्यक्ष/सचिव/संयुक्त सचिव/सेवादार को उपरोक्त दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया जाता है। इस बीच, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मंजिंदर सिंह सिरसा ने आदेश में केवल गुरुद्वारों को लेकर जारी आदेश पर सवाल खड़ा किए।

डीडीएमए के इस चेतावनी की सिरसा ने की निंदा

सिरसा ने ट्वीट किया कि अंकुर प्रकाश का परिपत्र पढ़कर अंचभित हूं जोकि सभी धार्मिक स्थलों को लेकर चिंता जाहिर करता है लेकिन केवल गुरुद्वारों को श्रद्धालुओं के लिए बंद रखने का जिक्र किया गया है। अन्य धार्मिक स्थलों का खासकर उल्लेख क्यों नहीं किया गया? गुरुद्वारों के अध्यक्षों/सचिवों और सेवादारों के लिए ऐसे सख्त लहजे का उपयोग क्यों? उन्होंने कहा कि हम डीडीएमए के इस भेदभावपूर्ण रवैये की निंदा करते हैं। या तो इस आदेश को रद्द किया जाए अथवा परिपत्र में सभी धार्मिक स्थलों का उल्लेख किया जाए।

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