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दिल्ली में फिर से रोकी गई 'घर-घर राशन योजना', CM केजरीवाल ने केंद्र से जताई नाराजगी, हाथ जोड़कर की ये भावुक अपील

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने एक बार नहीं 5 बार आपकी मंजूरी ली है। कानूनन किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। राशन की होम डिलिवरी क्यों नहीं होनी चाहिए? आप राशन माफिया के साथ खड़े होंगे, तो गरीबों के साथ कौन खड़ा होगा? उन 70 लाख गरीबों का क्या होगा जिनका राशन ये राशन माफिया चोरी कर लेते हैं।

दिल्ली में फिर से रोकी गई घर-घर राशन योजना, CM अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से जताई नाराजगी, हाथ जोड़कर की ये भावुक अपील
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CM अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से जताई नाराजगी

Delhi Government दिल्ली में एक फिर से 'घर-घर राशन योजना' (Door Door Ration Scheme) रोक दी गई है। जिसके लेकर आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेस (Press Conference) करके लोगों को जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते से घर-घर राशन पहुंचाने का काम शुरू होने वाला था। सारी तैयारी हो गई थी और अचानक आपने 2 दिन पहले इसे क्यों रोक दिया? ये कह के इसे खारिज किया गया है कि हमने केंद्र सरकार (Central Government) से इसकी मंजूरी नहीं ली। ये गलत है।

सीएम केजरीवाल ने कहा कि हमने एक बार नहीं 5 बार आपकी मंजूरी ली है। कानूनन किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। राशन की होम डिलिवरी क्यों नहीं होनी चाहिए? आप राशन माफिया के साथ खड़े होंगे तो गरीबों के साथ कौन खड़ा होगा? उन 70 लाख गरीबों का क्या होगा जिनका राशन ये राशन माफिया चोरी कर लेते हैं। केंद्र सरकार ने किस आधार पर इस योजना को रोका है कि दिल्ली सरकार ने उससे इसकी मंजूरी नहीं ली।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने 'घर-घर राशन' योजना के लिए केंद्र सरकार से पांच बार मंजूरी ली है और कानूनन उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं थी, फिर भी उसने मंजूरी ली, क्योंकि वह केंद्र सरकार के साथ कोई विवाद नहीं चाहते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में यह योजना सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू होनी चाहिए, क्योंकि राशन की दुकानें 'सुपरस्प्रेडर' (महामारी के अत्यधिक प्रसार वाली जगह) हैं।

दिल्ली सरकार ने किया दावा

दिल्ली सरकार ने दावा किया कि केंद्र ने राष्ट्रीय राजधानी में 72 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभान्वित करने वाली उसकी महत्वाकांक्षी राशन योजना को रोक दिया और उसने इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताया। हालांकि, केंद्र सरकार ने आरोपों को आधारहीन करार दिया है। केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा कि दिल्ली सरकार जिस तरह चाहे राशन वितरण कर सकती है और उसने दिल्ली सरकार को ऐसा करने से नहीं रोका है। बयान के मुताबिक कि वे किसी अन्य योजना के अंतर्गत भी ऐसा कर सकते हैं। भारत सरकार अधिसूचित दरों के अनुसार इसके लिए राशन उपलब्ध कराएगी। ऐसा कहना बिल्कुल गलत होगा कि केंद्र सरकार किसी को कुछ करने से रोक रही है।

केंद्र ने आरोप 'आधारहीन' बताया

इसके मुताबिक कि केंद्र सरकार दिल्ली को अतिरिक्त राशन प्रदान करने को भी तैयार है, फिर दिल्ली सरकार उसे जिस तरह चाहे वितरित करे। केंद्र सरकार किसी भी जन कल्याणकारी योजना से नागरिकों को क्यों वंचित करेगी? इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि उपराज्यपाल ने प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है जैसा दिल्ली सरकार द्वारा चित्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निजी विक्रेताओं के माध्यम से लागू की जाने वाली योजना की अधिसूचना से संबंधित फाइल को उपराज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री को लौटा दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने कहा कि सरकार अगले कुछ दिनों में योजना शुरू करने के लिए तैयार थी।

उपराज्यपाल ने योजना को लागू करने से रोका

सीएमओ ने एक बयान में दावा किया कि उपराज्यपाल ने दो जून को यह कहते हुए फाइल वापस कर दी कि योजना को लागू नहीं किया जा सकता है। उसने कहा कि उपराज्यपाल ने दो कारणों का हवाला देते हुए राशन को घर-घर तक पहुंचाने संबंधी योजना के कार्यान्वयन के लिए फाइल को खारिज कर दिया है एक तो केंद्र ने अभी तक योजना को मंजूरी नहीं दी है और दूसरा अदालत में मामला चल रहा है। दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन ने हालांकि दावा किया कि कानून के मुताबिक इस तरह की योजना शुरू करने के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। हुसैन ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार द्वारा 2018 से केंद्र को छह से अधिक पत्र भेजे गए थे जिसमें उन्हें योजना के बारे में सूचित किया गया था।

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