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Nasal Vaccine: AIIMS में जल्द होगा भारत बायोटेक की 'नेजल स्प्रे वैक्सीन' का ट्रायल, जानें क्या है पूरा प्रोसेस

इसका नाम बीबीवी154 कोरोना वैक्सीन दिया गया है, जिसका ट्रायल भारत में इंसानों पर किया जाएगा। पहला ट्रायल 18 से 60 साल के उम्र के वॉलंटियर पर किया गया था। यह ट्रायल सफल रहा था। अब जल्द ही दूसरे चरण का ट्रायल किया जाएगा। इसके सफल होने के बाद तीसरे चरण के ट्रायल की तरफ रुख किया जाएगा। एम्स में 2 से 18 साल के बच्चों पर भी कोवैक्सिन का सफल ट्रायल हो चुका है।

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AIIMS में जल्द होगा भारत बायोटेक की 'नेजल स्प्रे वैक्सीन' का ट्रायल, जानें क्या है पूरा प्रोसेस

दिल्ली समेत देशभर में कोरोना (Corona Pandemic) से बचने के लिए एक मात्र तरीका वैक्सीनेशन (Vaccination) है। जो की देशभर में वैक्सीन अभियान (Corona Vaccine Campaign) तेजी से चल रहा है। लेकिन अब कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण के अलावा नेजल वैक्सीन (Nasal Vaccine) के बारे में भी विचार किया जा रहा है। देश और दुनिया में कोरोना की नाक के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन को लेकर काफी खोज की जा रही है। वहीं, दिल्ली में स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) में नेजल वैक्सीन (Nasal vaccine) BBV154 का जल्द ट्रायल होने जा रहा है। ये वैक्सीन भारत बायोटेक की है। जिस पर जल्द ही ट्रायल शुरू किया जाएगा। एम्स ने बताया कि ये ये ट्रायल दूसरे और तीसरे चरण के होंगे। भारत बायोटेक की इस वैक्सीन के ​​ट्रायल की जिम्मेदारी प्रमुख इन्वेस्टिगेटर डॉ संजय राय को दी गई है।

28 दिनों में लगेंगे नेजल वैक्सीन के दोनों डोज

एथिक्स कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद वॉलंटियर पर इस वैक्सीन के दोनों डोज 28 दिनों के बीच में दिए जाएंगे। यह अपने तरह की पहली वैक्सीन है। इसका नाम बीबीवी154 कोरोना वैक्सीन दिया गया है, जिसका ट्रायल भारत में इंसानों पर किया जाएगा। पहला ट्रायल 18 से 60 साल के उम्र के वॉलंटियर पर किया गया था। यह ट्रायल सफल रहा था। अब जल्द ही दूसरे चरण का ट्रायल किया जाएगा। इसके सफल होने के बाद तीसरे चरण के ट्रायल की तरफ रुख किया जाएगा। एम्स में 2 से 18 साल के बच्चों पर भी कोवैक्सिन का सफल ट्रायल हो चुका है।

ऐसे काम करती नेजल स्प्रे वैक्सीन

नेजल वैक्सीन को इंजेक्शन की बजाय नाक से दिया जाता है। यह नाक के अंदरुनी हिस्सों में इम्युन तैयार करती है। इसे ज्यादा कारगर इसलिए भी माना जाता है क्योंकि कोरोना समेत हवा से फैलने वाली अधिकांश बीमारियों के संक्रमण का रूट प्रमुख रूप से नाक ही होता है और उसके अंदरूनी हिस्सों में इम्युनिटी तैयार होने से ऐसे बीमारियों को रोकने में ज्यादा असरदार साबित होती है। आपको बता दें कि भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को अगस्त में दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए मंजूरी मिली थी. सूत्रों ने जानकारी दी है कि एम्स में नेजल वैक्सीन के ट्रायल अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो जाएंगे। ट्रायल की अनुमति के लिए एम्स की एथिक्स कमेटी के पास आवेदन दिया गया है।

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