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हटके खबर: जो नहीं करते थे सीधे मुंह से बात, अब कम किराए पर भी मकान देने को हैं तैयार

कोरोना महामारी से पहले जो मकान मालिक किराएदारों से कभी सीधे मुंह से बात तक नहीं करते थे और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर उल्टे-सीधे पैसे बटोरते थे, वहीं मकान मालिक अब लोगों के दिल्ली/एनसीआर से पलायन कर जाने के बाद अब किरादारों के आने की बांट जोह रहे हैं। और कम कीमत पर अपना मकान किराए पर देने को तैयार हैं।

हटके खबर: जो नहीं करते थे सीधे मुंह से बात, अब कम किराए पर भी मकान देने को हैं तैयार
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प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना महामारी से पहले जो मकान मालिक किराएदारों से कभी सीधे मुंह से बात तक नहीं करते थे और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर उल्टे-सीधे पैसे बटोरते थे, वहीं मकान मालिक अब लोगों के दिल्ली/एनसीआर से पलायन कर जाने के बाद अब किरादारों के आने की बांट जोह रहे हैं। और कम कीमत पर अपना मकान किराए पर देने को तैयार हैं।

कोरोना संकट काल में एनसीआर से लगभग 50 प्रतिशत लोग अपने घरों की ओर पलायन कर गए। इस समय छोटी-मोटी फैक्ट्री या तो बंद पड़ी हैं या फिर एक सीमित संसाधन और सीमित मैन पावर के साथ काम कर रहीं हैं। एनसीआर में अब लोग पहले की तरह काम की तलाश या फैक्ट्रियों आदि काम करते नजर नहीं आ रहे हैं। अधिकतर लोग कोरोना के भय से अपने घरों को चले गए हैं। और यहां के वाशिंदे और रहीसजादे जिनका काम केवल मकान आदि किराए पर देकर मौज मस्ती करना था। ऐसे लोग अब परेशान नजर आने लगे हैं। मकान-दुकान खाली होने के कारण उनकी आमदनी चौपट हो गई है। ऐसे लोग जिनका कोई और व्यवसाय नहीं है, केवल किराए के पैसे पर ही निर्भर हैं, और कई मकान बहुमंजिला बनाकर अच्छी खासी आमदनी का जुगाड़ बना रखा है। ऐसे लोग अब अपने खर्चे पूरे करने की जुगत में किराएदारों की बांट जोहने को मजबूर हैं।

धंधा हुआ चौपट

किराएदारों के पलायन कर जाने से मकान मालिकों का धंधा चौपट हो गया है। और मकान मालिक अब किरादारों के इंतजार में बेचैन हैं। और उनके आने की बांट जोह रहे हैं।

नई दिल्ली स्थित रमेश नगर के निवासी भूपेंद्र सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि कोरोना संकट की वजह से सब धंधे बंद हो गए हैं। यहां काम करने वाले लोग और बाहरी राज्यों से यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी अब यहां से पलायन कर गए हैं। जिसके बाद किराए पर गुजर बसर करने वाले लोगों की आमदनी खत्म हो गई है। लोग रोजमर्रा की चीजें तक खरीदने को मजबूर हो गए हैं। लोगों के चले जाने से मकान खाली पड़े हैं। लोग वापस आएं तो कोई बात बने।

वहीं दूसरी ओर रमेश नगर के पास ही स्थित बसईदारा पुर के निवासी हिमान्शु ने बताया कि मकान खाली होने के कारण और काेई अन्य आमदनी की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्होंने कम कीमत पर भी अपने मकान किराए पर दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि अन्य लोग भी इस प्रकार कम कीमत पर मकान किराए पर देने को तैयार हैं।

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