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World Environment Day Special : उम्र ढली पर हौसला बुलंद, बंजर पहाड़ी में ले आये हरियाली का मंजर

60 साल के संजय ने बड़ी संख्या में बगैर कोई सरकारी मदद लिए पौधारोपण किया है। पढ़िए पूरी खबर-

World Environment Day Special : उम्र ढली पर हौसला बुलंद, बंजर पहाड़ी में ले आये हरियाली का मंजर
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कोरिया। मनेंद्रगढ़ के रेलवे परिक्षेत्र में रहने वाले संजय गायकवाड़ ने पर्यावरण संरक्षण के जुनून व नेक इरादे से पहाड़ी बंजर भूमि में हरियाली का मंजर ला दिया है। वे राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से लगे बंजर भूमि में विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण कर हरियाली लाकर इसे उद्यान का शक्ल दे चुके हैं। इतना ही नहीं मनेन्द्रगढ़ की पहचान सिद्ध बाबा पहाड़ में भी संजय ने बड़ी संख्या में बगैर कोई सरकारी मदद लिए पौधारोपण किया है। यहां भी वे हरियाली लाने में दिन रात जुटे है।

संजय बताते है कि वे अपने मित्र डॉ. के पी पटेल के साथ जब भी राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से होकर गुजरते थे तो उनके मित्र उनसे इच्छा जताते थे कि यहां हरियाली लाई जाए। तब से संजय इस बंजर पहाड़ में हरियाली लाने में जुट गए। संजय का पर्यावरण के प्रति प्रेम घर मे गार्डनिंग करके जागा।

तैयार कर ली खुद की नर्सरी

संजय को जब सरकारी नर्सरी से पौधे लेने में दिक्कतें आनी लगीं तो संजय ने अपने फार्म हाउस में खुद की नर्सरी तैयार कर ली। नर्सरी में पौधे तैयार कर वे जगह-जगह पौधारोपण कर रहे है। संजय बताते है कि उन्होंने बिलासपुर और महाराष्ट्र से पौधे लाकर बंजर पहाड़ और सिद्ध बाबा पहाड़ में पौधरोपण किये है।

देखभाल भी खुद ही

पौधरोपण करने के बाद संजय खुद ही पौधों की देखभाल भी करते है। इस काम मे उनका स्टाफ और उनके द्वारा बनाये गए ग्रीन वैली क्लब के सदस्य भी हाथ बंटाते है। संजय का कहना है कि पर्यावरण के लिए काम करना अब उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। वे रोजाना 8 से 10 घण्टे पर्यावरण के लिए देते हैं।

कार से दे रहे पर्यावरण का संदेश

संजय अपनी कार में पर्यावरण को लेकर कई स्लोगन व नारे लिखवाए है। वे जहां भी जाते है अपनी इसी कार से जाते है ताकि लोग कर में लिखे स्लोगन को पढ़े और पर्यावरण को लेकर जागरूक हो। जहां भी संजय की कार खड़ी रहती है लोग कार में लिखे पर्यावरण स्लोगन को पढ़ते है। 60 वर्षीय संजय की कार अब उनकी पहचान बन गयी है।

संजय का कहना है कि- 'अपने लिए सभी लोग जीते हैं, लेकिन प्रत्येक आदमी को दूसरों के लिए भी जीना चाहिए, तभी जीवन सार्थक होगा। पेंड़ हमें सद्भाव एवं त्याग की प्रेरणा देते हैं, इसलिए हम सभी को मिलकर पौधा लगाना चाहिए।'



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